प्रेम कहानी
एक श्राप के कारण राधा रानी को कभी नहीं छू पाए उनके पति!, इस कथा से आपको इस बारें में पता चलेंगा।
ब्रह्मावैवर्त पुराण
राधारानी का विवाह भगवान श्रीकृष्ण से नहीं बरसाना के ही महापंडित उग्रपत के पुत्र अयन से हुआ था।
वरदान
उग्रपत राधारानी के पिता बृषभानु के परम मित्र थे और मदद करने के कारण बृषभानु जी ने उन्हें वर दिया जो वो कभी भी मांग सकते थे।
मांगा हाथ
वर में उन्होंने अयन के लिए राधारानी का हाथ मांग लिया।
भावी राजा
अयन राधारानी से विवाह के बाद भावी राजा बने लेकिन राधारानी ने कभी उसे पति का अधिकार नहीं दिया।
वश का फल
एक बार छल से राधा जी को वो फल खिलाना चाहता था जिससे वह उनके वश में हो जाएं।
अयन को श्राप
ऋषि दुर्वासा ने अयन को श्राप दिया कि यदि तुमने राधारानी का हाथ लगाया तो जलकर भस्म हो जाओगे।

