प्रेग्नेंसी से जुड़े मिथकों पर न करें यकीन, जानें जरूरी बातें
मॉर्निंग सिकनेस का संबंध बच्चे को उचित पोषण न मिलने से जोड़ा जाता है, जबकि यह प्रेगनेंसी का एक सामान्य लक्षण है।
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प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज न करना भी एक मिथक है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना शिशु के विकास और नॉर्मल डिलीवरी के लिए अच्छा माना जाता है।
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मन को खुश रखने के लिए कमरे में एक तस्वीर रखी जा सकती है, लेकिन इसका सुंदर बच्चे से कोई लेना देना नहीं।
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शिशु का दिखना जीन्स पर निर्भर करता है, इसलिए ऐसे मिथकों पर विश्वास न करें।
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अगर डॉक्टर गर्भावस्था की पहली तिमाही में आराम करने की सलाह देते हैं तो इसका पालन करें।
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अन्यथा, पहले तीन महीनों में शरीर को सक्रिय रखने से पेट में ऐंठन और सूजन से बचा जा सकता है।
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भारत में लिंग परीक्षण अपराध है, इसलिए पेट के आकार के आधार पर लड़का होगा या लड़की, इसे लेकर भ्रांतियां फैलाई जाती हैं।
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इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पपीता खाने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
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डिलीवरी को आसान बनाने के लिए महिलाओं को घी खिलाया जाता है, जिससे वजन बढ़ेगा और डिलीवरी में दिक्कत आ सकती है।
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कैफीन का अत्यधिक सेवन हानिकारक है, लेकिन इसका गर्भावस्था के दौरान गर्भपात से कोई संबंध नहीं है। आप इसे डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं।
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नौ महीने तक सेक्स न करने की बात भी एक मिथक है, इस दौरान सावधानी के साथ सेक्स करने से कोई नुकसान नहीं है।
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गर्भावस्था के दौरान सावधानी से सेक्स करने से गर्भवती महिलाओं में प्री-एक्लेमप्सिया का खतरा कम हो जाता है।
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केसर के सेवन से बच्चा गोरा हो या न हो, लेकिन उचित पोषण से बच्चा स्वस्थ और ताकतवर बन सकता है।
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Disclaimer: यहां दी गई सलाह और सुझाव केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए हैं। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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