7bf4a71350b4bdabfa03eed3c69b90e0

भारत के इन मंदिरों में होती है खंडित शिवलिंग की पूजा, जानिए क्यों?

हिंदू धर्म में खंडित शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती है। किंतु धार्मिक नगरी कड़ा धाम के महाकालेश्वर मंदिर में खंडित शिवलिंग की वर्षों से पूजा होती चली आ रही है।
Published on: 
Updated on: 
c17f8b6833a0bd1874d67fa5fd1abb3e
Photo: Social Media

पुरातन काल से ही खंडित मूर्ति या फिर फोटो की पूजा नहीं करने की विधि चलती आ रही है।

khandit-shivling-ki-puja-696x497
Photo: Social Media

कहा जाता है कि भगवान की आराधना के वक्त पूरा ध्यान उनकी तस्वीर या प्रतिमा पर केंद्रित होती है और खंडित होने की वजह से बार-बार ध्यान उसी ओर जाता है जिस वजह से पूजा में मन नहीं लगता।

1cac9a35522ed4d79a09fb576d9d20b4
Photo: Social Media

हिंदू ग्रंथों में शिव शंकर को ब्रह्म रूपी है और शिवलिंग को शिव का निराकार रूप कहा गया है। अर्थात जिनका कोई आकार नहीं है। इसलिए ऐसा माना जाता है शिव जी का प्रतीक शिवलिंग कहीं से टूट जाने पर भी कभी खंडित नहीं कहलाता।

2c0f46daa059370f5c7aefb198bc601f
Photo: Social Media

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग बहुत ज्यादा टूट जाने पर भी पूजनीय होता है, क्योंकि महादेव का न तो आदि है और न ही अंत।

a797771d580cc3fc0fc173c176c2e1be
Photo: Social Media

ऐसा माना जाता है कि खंडित शिवलिंग की पूजा करने से भी मनोकामना पूरी हो जाती है।

2ef356560b3593c67a37e66ca15b68eb
Photo: Social Media

शास्त्रों के अनुसार, शिव जी दस दिशाओं में विराजमान हैं, तो शिवलिंग किसी भी दिशा में रखा जा सकता है, लेकिन पूजा करने वाले का मुख उत्तर दिशा में हो तो सर्वोत्तम है।

058bcc161fc43b3d8ce9eb09e86ed7d8
Photo: Social Media

शिवलिंग के पास हमेशा ही गोरी व गणेश की मूर्ति विराजित हो, अकेला शिवलिंग शुभदायी नहीं होता।

बता दें कि धार्मिक नगरी कड़ा धाम के महाकालेश्वर मंदिर, राजस्थान के अरावली पर्वत पर स्थित है महादेव का खंडित शिवलिंग, झारखंड के गोइलकेरा में भी खंडित शिवलिंग की पूजा होती है।

24f55b7554254e5d6c9fef1f3a524043
Photo: Social Media

24f55b7554254e5d6c9fef1f3a524043

8cd969cc02fa18e9453a1904c4890e16
Photo: Social Media

इन मंदिरों में पूरे विधि विधान से खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है।

image

संबंधित खबरें

No stories found.
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com