Swara Bhasker Statement on Jauhar: अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा फिल्म 'पद्मावत' के जौहर वाले दृश्य पर दिए गए पुराने बयान का फिर से जिक्र करने के बाद जौहर की ऐतिहासिक प्रथा को लेकर विवाद गहरा गया है। दिल्ली के एक कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने कहा था कि ऐतिहासिक फिल्मों में जौहर दिखाने से यौन हिंसा झेल चुकी महिलाओं को गलत संदेश जाता है, क्योंकि किसी के साथ यौन हिंसा होना उसकी जिंदगी का अंत नहीं होना चाहिए। हालांकि विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा, बल्कि उनकी आपत्ति पर्दे पर उस दृश्य के संदेश को लेकर थी। इतिहास के पन्नों में जौहर को मुख्य रूप से युद्ध के दौरान राजपूत महिलाओं द्वारा किए जाने वाले सामूहिक आत्मदाह के रूप में देखा गया है, जो किसी किले की निश्चित हार और दुश्मन सेना द्वारा बंदी बनाए जाने या गुलामी के डर से अपने सम्मान की रक्षा के लिए किया जाता था।
मध्यकालीन युद्धों की परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं, जहां पराजित पक्ष की महिलाओं के पास सुरक्षा का कोई जरिया नहीं होता था। वहीं आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के अधिकारों और आत्मदाह के औचित्य पर सवाल खड़े किए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जौहर को केवल आज के आधुनिक नजरिए से देखकर गलत ठहराना इतिहास को अधूरा समझने जैसा है, बल्कि इसे उस दौर के युद्ध, सामाजिक सोच और आत्म-बलिदान के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। पूरी जानकारी के लिए देखें नवभारत की यह खास रिपोर्ट...