Devbhoomi Family ID: उत्तराखंड में नया नियम लागू, बाहरी लोगों को नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

Devbhoomi Family ID: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पिछले 15 सालों से रह रहे नागरिकों के लिए देवभूमि परिवार कानून लागू किया है। इसके तहत पात्र लोगों को नई आईडी मिलेगी जिससे फर्जीवाड़ा रुकेगा।
Devbhoomi Family ID: Uttarakhand Govt Launches New 15 Years Law To Provide Benefits For All Citizens
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देवभूमि परिवार आईडी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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New Devbhoomi Family ID Scheme: उत्तराखंड में अब केवल पात्र लोग ही सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठाएंगे। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देवभूमि परिवार अधिनियम-2026 को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। 14 जून से यह महत्वपूर्ण कानून पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है। राज्य में पिछले 15 सालों से रह रहे स्थायी लोगों को देवभूमि परिवार आईडी मिलेगी तथा बाहर से आकर रह रहे लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

इस विशिष्ट आईडी के जरिए नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी एक केंद्रीकृत डेटाबेस में दर्ज की जाएगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ असली लोगों तक बहुत ही पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाएगा। एक आईडी होने से अलग-अलग लाभ लेने का पूरा प्रोसेस काफी आसान हो जाएगा। एक ही परिवार द्वारा कई बार अनुचित लाभ लेने की पुरानी संभावना भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

महिलाओं को नई पहचान

इस कानून की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। परिवार में 18 वर्ष या अधिक उम्र की वरिष्ठ महिला को ही मुखिया माना जाएगा। इससे समाज में महिलाओं की भूमिका को एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी। सभी सरकारी लाभ अब परिवार की इन महिला मुखियाओं के माध्यम से ही संचालित होंगे। उत्तराखंड सरकार का यह कदम महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।

प्राधिकरण का कड़ा गठन

पूरी व्यवस्था की सख्त निगरानी के लिए देवभूमि परिवार प्राधिकरण का विशेष रूप से गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होंगे और मुख्य सचिव उपाध्यक्ष की अहम भूमिका निभाएंगे। नियोजन, न्याय और आईटी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इसके मुख्य सदस्य होंगे। तकनीकी पहलुओं को मजबूत करने के लिए तीन अनुभवी साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा ताकि पूरा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित रहे।

सुरक्षा और भारी सजा

डेटा सुरक्षा के लिए इसे डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 के अनुरूप तैयार किया गया है। डेटाबेस से छेड़छाड़ करने पर 10 साल की सजा और 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना होगा। झूठी जानकारी देकर पहचान बदलने पर 3 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। अनाधिकृत रूप से सरकारी डेटा इकट्ठा करने पर 3 साल की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना होगा। सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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