रामायण भेंट करने का उद्देश्य बंदियों को प्रभु श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा से प्रेरणा लेने का अवसर देना था। इस अवसर पर अरुण गोविल जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, सेवा, त्याग, करुणा और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रामायण का अध्ययन बंदियों को आत्मचिंतन, मन की शांति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देगा। (सोर्स- फोटो नवभारत)