पाकिस्तानी है अखिलेश यादव का पीडीए पंचांग, मनोज तिवारी ने सपा को लेकर ये क्या कह दिया?

PDA Panchang Controversy: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अखिलेश यादव द्वारा जारी 'सपा पीडीए पंचांग' को 'पाकिस्तानी कैलेंडर' करार दिया है। उन्होंने राम मंदिर की तिथि न होने पर इसे संस्कृति का अपमान बताया।
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मनोज तिवारी, फोटो- सोशल मीडिया
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Manoj Tiwari on PDA Panchang: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के नए 'PDA पंचांग-2026' को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस कैलेंडर में अयोध्या राम मंदिर की तिथि शामिल न करने पर अखिलेश यादव को घेरते हुए इसे भारतीय संस्कृति का अपमान बताया है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के 'PDA पंचांग' पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस कैलेंडर की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'पाकिस्तानी कैलेंडर' की संज्ञा दी है। तिवारी का मुख्य आरोप है कि इस पंचांग में राम मंदिर निर्माण की ऐतिहासिक तिथि का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कैलेंडर से इस महत्वपूर्ण जानकारी को हटाना न केवल भगवान राम का विरोध है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय संस्कृति का अपमान है, जिसे यूपी की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

क्या है अखिलेश यादव का 'PDA पंचांग-2026'?

आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में 'समाजवादी पीडीए पंचांग-2026' का विमोचन किया था। सपा के अनुसार, इस पंचांग को विशेष रूप से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समाज को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें पीडीए समाज से जुड़े महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को प्रमुखता से शामिल किया गया है। पंचांग में दैनिक आवश्यकता के कॉलम के साथ-साथ राष्ट्रीय और ऐतिहासिक दिवसों का भी विवरण दिया गया है।

मनोज तिवारी ने कहा समाज के दुश्मन

मनोज तिवारी ने आगे कहा, 'देखिए कहने में तकलीफ होती है लेकिन वो लोग अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे हैं। राम मंदिर की डेट भूलना ये सिर्फ राम से विरोध नहीं है, भारतीय संस्कृति से विरोध हैं। एक बार लोगों ने थोड़े सांसद बना दिए हैं लेकिन अब इनका खाता भी नहीं खुलेगा। ये अपनी करनी का फल भुगतेंगे।'

पंचांग को लेकर सपा का उद्देश्य

सपा की ओर से जारी यह पीडीए पंचांग केवल तिथियों की जानकारी देने वाला माध्यम नहीं है, बल्कि इसे एक सामाजिक और राजनीतिक उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें सामाजिक आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण दिनों और समाज के नायकों को याद करने का अवसर प्रदान किया गया है। इसमें पर्व-त्योहार, व्रत और विशेष तिथियों का समावेश इसे हर वर्ग के लिए है। पार्टी का उद्देश्य इसके जरिए अपने कार्यकर्ताओं और समाज को नायकों के विचारों से जोड़ना है।

मचेगा सियासी घमासान!

जहां भाजपा इसे सांस्कृतिक मूल्यों की अनदेखी बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे सामाजिक न्याय के नायकों के सम्मान से जोड़कर देख रही है। मनोज तिवारी के 'पाकिस्तानी कैलेंडर' वाले बयान के बाद अब उत्तर प्रदेश में आस्था बनाम सामाजिक पहचान की राजनीति और तेज होने की संभावना है।

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