

डिप्टी कमिश्नर (GST) अनुपमा राग ने इस्तीफा दिया
सिधौली सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की अटकलें
पति अनुराग भदौरिया सपा प्रवक्ता, मां सुशीला सरोज रह चुकी सांसद
Samajwadi Party Anupama Raag: उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (GST) के पद पर तैनात रहीं PCS अधिकारी अनुपमा राग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद सरकार ने उनका स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है।
उन्होंने सोशल मीडिया X पर वीडियो जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। साथ ही भविष्य में नए संकल्प के साथ नई शुरुआत करने की बात कही है।
अनुपमा राग समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद सुशीला सरोज की बेटी हैं। साथ ही समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता और अखिलेश यादव के करीबी अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं। इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस्तीफे के बाद राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
चर्चा है कि वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर सीतापुर जिले की सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने कोई घोषणा नहीं की है।
अनुपमा राग और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की मुलाकात दिल्ली में UPSC की कोचिंग के दौरान हुई थी। इसके बाद 2006 में दोनों ने लव मैरिज की। उनका एक बेटा भी है।
अनुपमा की मां सुशीला सरोज भी राजनीति में सक्रिय रही हैं। वह साल 2004 में सांसद चुनी गई थीं और मुलायम सिंह यादव सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं।
इसके अलावा अनुपमा के पिता राम प्रकाश (आरपी) सरोज 1964 बैच के IPS अधिकारी थे।अनुराग भदौरिया भी लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।
अनुपमा राग प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ शास्त्रीय संगीत में भी प्रशिक्षित हैं। उन्होंने साल 2011 में फिल्म 'बिन बुलाए बाराती' के गाने 'शालू के ठुमके' से बॉलीवुड में कदम रखा था। वह राहत फतेह अली खान और मीका सिंह जैसे गायकों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
अनुपमा खुद गाने लिखती हैं, उनकी धुन तैयार करती हैं और गाती भी हैं। उनके संगीत के योगदान के लिए तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने उन्हें यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया था।
सीतापुर जिले की सिधौली विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यह सीट लखनऊ की सीमा से सटी है और मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। अनुराग भदौरिया का सीतापुर से संबंध होने के कारण चर्चा है कि समाजवादी पार्टी अनुपमा राग को यहां से उम्मीदवार बना सकती है।
हालांकि, इस सीट पर पार्टी के सामने टिकट को लेकर राजनीतिक समीकरण भी चुनौती बन सकते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने पहले मनीष रावत का टिकट काटकर हरगोविंद भार्गव को उम्मीदवार बनाया था।
हरगोविंद भार्गव करीब 96 हजार वोट पाने के बावजूद चुनाव हार गए थे। टिकट कटने से नाराज मनीष रावत भाजपा में शामिल हो गए और करीब आठ हजार वोटों से चुनाव जीत गए थे।
ऐसे में चुनाव हारने के बावजूद हरगोविंद भार्गव का टिकट काटकर किसी नए चेहरे को उम्मीदवार बनाना सपा के लिए आसान नहीं होगा।