

कर्ज लेकर कराया इलाज, नहीं चला आयुष्मान कार्ड
आयुष्मान भारत योजना को आइना दिखा रहे कानपुर के अस्पताल
पांच अस्पतालों ने नहीं किया आयुष्मान कार्ड से इलाज
Ayushman Bharat Scheme Reality: कानपुर में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने आयुष्मान भारत योजना की हकीकत दिखा दी और इस योजना को आईना दिखाने का काम किया। एक मजदूर अपने इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड लेकर एक महीने तक अस्पतालों में भटकता रहा लेकिन किसी भी अस्पताल ने उसका आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं किया। मजदूर को अपनी जान बचाने के लिए चार लाख रुपये का कर्ज लेकर इलाज कराया।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लोगों को सरकार द्वारा 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज कराने का दावा किया जाता है लेकिन यह दावे कानपुर में फेल होते हुए दिखाई दे रहे हैं। चौबेपुर के रहने वाले शशिकांत को सितंबर महीने में बुखार आया था। 23 सितंबर को वह प्रकाश नर्सिंग होम चौबेपुर में अपना इलाज कराने गए।
आराम नहीं मिलने पर आयुष्मान कार्ड लेकर कल्याणपुर के विश्वास हॉस्पिटल पहुंचे जहां बड़ा-बड़ा दीवारों पर लिखा था- 'आयुष्मान कार्ड से इलाज किया जाता है', लेकिन हकीकत तो तब पता चली जब शशिकांत अस्पताल में भर्ती होने के लिए अंदर गए। यहां पर उनसे नगद रुपए वसूल लिए गए और आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं किया गया। आराम न मिलने पर उनके परिजनों उन्हें गुरुदेव पैलेस चौराहे के पास लखनपुर हॉस्पिटल लेकर गए यहां शशिकांत को भर्ती कर आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
शशिकांत की पत्नी ने अस्पताल के डॉक्टर बीके सिंह पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जैसे ही डॉक्टर ने इलाज के रुपए जमा करने के लिए कहा तो शशिकांत आयुष्मान कार्ड लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर कार्ड देखते ही भड़क गए। उन्होंने कहा कि मोदी से कार्ड बनवाया है तो मोदी से ही इलाज करा लो जाकर। इलाज कराना है तो नगद रुपए लाने होंगे।
इसके बाद परिजनों के हाथ पांव फूल गए। अब तक उन्होंने कर्ज लेकर लगभग चार लाख रुपए का इलाज तो करा लिया लेकिन एक मजदूर और उसके गरीब परिवार को आयुष्मान भारत योजना से वंचित रहना पड़ा। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद भी अस्पताल में उनका इलाज नहीं किया गया जिसके चलते उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की शिकायत की है।
इसके अलावा अन्य अस्पतालों में जाने पर वहां पहले से ही मरीज को बता दिया गया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज हो ही नहीं पाएगा। अब मरीज को अपनी जान बचानी थी तो मजबूरन कर्ज लेकर इलाज कराया। न्याय की गुहार लगाते हुए शशिकांत और उसकी पत्नी रो पड़े और उन्होंने कहा हालात यह हो गई है कि अब बच्चों को पढ़ने के लिए भी रुपए नहीं बचे हैं।
पीड़ित ने पूरे प्रकरण की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। पीड़ित का आरोप है कि वह पांच अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड लेकर भटका लेकिन कहीं भी आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं किया गया। इसके विपरीत उससे चार लाख रुपये इलाज के नाम पर ले लिए गए। पीड़ित ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर को यह शिकायत प्रेषित कर दी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी टीम बनाकर इस प्रकरण पर जांच करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आए दिन निजी अस्पतालों से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही है। काफी गंभीर शिकायतें होने के बावजूद भी ऐसे अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। वहीं दूसरा सवाल यह कि ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध किया ही क्यों जाता है जो आयुष्मान भारत के तहत इलाज ही नहीं करते।
आयुष्मान भारत योजना को लेकर शुरुआत से ही असमंजस की स्थिति है। कई लोग अभी तक यह शिकायत कर रहे थे कि उनके आयुष्मान कार्ड बन ही नहीं रहे। कभी वेबसाइट पर नेटवर्क प्रॉब्लम आता है तो कभी फॉर्म भर जाने के बाद भी आयुष्मान कार्ड नहीं बनता लेकिन अब ऐसा मामला सामने आया जो अपने आप में इस योजना को आइना दिखा रहा है।
जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बने वह तो इस योजना से वंचित रह ही रहे हैं लेकिन जिनके पास आयुष्मान कार्ड है उनका भी इलाज कानपुर के अस्पतालों में नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि आयुष्मान कार्ड लेकर मरीज और उनके परिजन भटक रहे हैं। आयुष्मान कार्ड की सीमा अभी भी 5 लाख रुपए दिखा रही है लेकिन आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद भी शशिकांत के इलाज के लिए परिजनों को 4 लाख कर्ज लेने पड़ गए।