

Gulveer Singh Three Medals Asian Games Record: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं को खेलों के प्रति रूझान बढ़ाने की बात करते रहे हैं। युवा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों को बेहद गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि लगातार युवाओं का रुझान खेलों की तरफ बढ़ रहा है और आज भारत का इन्हीं युवाओं के चलते एशियन गेम्स में भारतीय टीम इतिहास गढ़ रहा है।
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की मांटी का लाल भी उत्तर प्रदेश के लोगों को गौरवान्वित करने का पूरा अवसर दे रहे हैं। यूपी के लाल ने इतिहास गढ़ दिया है, आगरा की कुलवीर पहले ऐसे भारतीय बन गए हैं जिन्होंने एक एशियन गेम्स में तीन पदक झटके हैं।
जापान में एशियन गेम्स चल रहे हैं, एशियन गेम्स में भारतीय टीम दमखम के साथ पदक भी अर्जित कर रही है। एशियन गेम्स के पदकवीरों में उत्तर प्रदेश की बेटे और बेटियां भी शामिल हैं जो लगातार देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इसी कड़ी में अलीगढ़ के लाल गुलबीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास गढ़ दिया है। अलीगढ़ का यह लाल देश का पहला ऐसा एथलीट बन गया है जिसने एक ही अटेम्प्ट में तीन तीन पदक अर्जित किए हैं। पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने एक ही एशियाड में तीन पदक अर्जित कर इतिहास रच दिया है।
गुलवीर सिंह ने मंगलवार को 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर एक ही एशियाई खेलों में अपने पदकों की हैट्रिक पूरी कर ली एक ऐसा इतिहास रचा हैजो आज तक किसी भारतीय ने नहीं रचा। इससे पहले गुलवीर 10 हजार मीटर और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक झटक कर अपने नाम कर चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ गुलवीर सिंह एक ही एशियाड में तीन व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए हैं।
गुलवीर की इस ऐतिहासिक सफलता ने भारत के लोगों का एक बार फिर सीना चौड़ा कर दिया है। अलीगढ़ से लेकर उनके गांव सिरसा तक हर्ष का माहौल है। जैसे ही 5000 मीटर में उनके कांस्य पदक जीतने की खबर गांव पहुंची, परिवार और ग्रामीणों में जश्न का माहौल बन गया। हर कोई अपने गांव के इस लाल की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
गुलवीर के पिता पप्पू सिंह अपने बेटे की ऐतिहासिक और शानदार सफलता से खुश ही नहीं बल्कि गौरवान्वित हैं। गुलवीर के परिजन बताते हैं कि इस बार उन्हें गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, लेकिन तीन पदकों के साथ गुलवीर ने जिस तरह एशियाड में अपनी छाप छोड़ी है, उससे परिवार का उत्साह कम नहीं हुआ है।
पिता पप्पू सिंह का कहना है कि गुलवीर ने देश, प्रदेश, गांव और परिवार का नाम रोशन किया है और उन्हें गुलवीर की उपलब्धि पर गर्व है।
गुलवीर की 100 वर्ष की दादी भी अपने पौत्र की जीत से बेहद खुश हैं। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अगर उनकी सेहत ठीक होती तो वह इस खुशी में जमकर नाचतीं और पूरे गांव में जश्न मनातीं।
गुलवीर सिंह की यह कामयाबी सिर्फ तीन पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अलीगढ़ और उत्तर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए भी बड़ी उपलब्धि है।
परिजनों का साफ तौर पर कहना है गुलवीर अब उनका बेटा नहीं बल्कि देश का बेटा है। हमें तो गुलवीर की इस ऐतिहासिक पदकों की तिगड़ी ने बेशक झूमने का मौका दिया हो लेकिन हमें उनसे उम्मीद अधिक थी, लेकिन गुलवीर द्वारा तीन पदक प्राप्त कर हम संतुष्ट हैं। गुलवीर ने देश के पदकों की संख्या बढ़ाने में अपना बड़ा योगदान दिया है।