अयोध्या में नया मंदिर विवाद, फर्जी दस्तावेजों से कब्जे की हुई साजिश; चंपत राय पर लगे गंभीर आरोप

Champat Rai Allegations: अयोध्या के राम निवास मंदिर को लेकर विवाद सामने आया है। चंपत राय समेत अन्य लोगों पर फर्जी दस्तावेजों से कब्जाने का आरोप लगा है।
New temple controversy in Ayodhya; plot to seize land using forged documents; serious allegations leveled against Champat Rai.
चंपत राय (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ayodhya Ram Niwas Temple Controversy: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का विवाद पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है। मामले के सामने के बाद से ही सूबे में जमकर सियासत हो रही है। प्रशासन द्वारा जांच तेज किए जाने के बाद रोज एक के बाद एक नया खुलासा हो रहा है। इसी बीच गुरुवार को राम मंदिर कैंपस के पास स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।

अब तक नहीं हुई कार्रवाई: पंच प्रमुख

स्वयं को राम निवास मंदिर का पंच प्रमुख बताने वाले हरिशंकर सफारीवाला ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव समेत उनके अन्य सहयोगियों पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के महासचिव अपने साथियों के साथ फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मंदिर पर कब्जा करने की साजिश रच रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद मामले पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

समिति ने लगाया गंभीर आरोप

हरिशंकर ने चंपत राय और साथियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होंने इस मंदिर को बेचने योग्य संपत्ति दिखाकर लगभग 5.80 करोड़ रुपये का एक फर्जी सौदा तैयार कराया था। हरिशंकर के मुताबिक, मंदिर में उनकी ओर से नियुक्त किया गया पुजारी और उसके करीबी रिश्तेदारों के खातों में करीब 60 लाख रुपये भेजे गए थे।

मंदिर में चढ़ावे का नहीं दिया हिसाब

इस दौरान हरिशंकर ने यह भी आरोप लगाया कि इस बीच मंदिर में आए श्रद्धालुओं के चढ़ावे का हिसाब मांगा गया, लेकिन उसका जवाब नहीं दिया गया। हरिशंकर सफारीवाला ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत अन्य कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी इसकी शिकायत की थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

समिति के सदस्यों पर परिसर छोड़ने का बनाया दबाव

हरिशंकर के अनुसार, मंदिर समिति के अन्य सदस्यों को भी करोड़ों का लालच दिया गया और उन पर मंदिर परिसर को छोड़ने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन मंदिर समिति ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया। समिति ने कहा कि यह मंदिर किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं है। यह एक पंचायती मंदिर है। इसे कभी नहीं बेचा जा सकता।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर और उसके आसपास की जमीन की कीमत आज लगभग 50 करोड़ रुपये तक है। हरिशंकर ने बताया कि पिछले करीब पांच सालों से कथित कब्जाधारकों के नियंत्रण में है।

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