

Agra Railway Division Meri Saheli: ट्रेन में अकेले सफर करने वाली महिलाओं के मन में अक्सर सुरक्षा को लेकर कई सवाल और आशंकाएं रहती हैं। रात का सफर हो या लंबी दूरी की ट्रेन, अनजान यात्रियों के बीच अकेली महिला को किसी भी परेशानी की स्थिति में मदद मिलने की चिंता रहती है।
अब इसी चिंता को दूर करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की ‘मेरी सहेली’ पहल महिलाओं के लिए सुरक्षा के भरोसे का नया सहारा बनती दिखाई दे रही है।
आगरा रेल मंडल में अप्रैल से जुलाई 2026 तक चलाए गए ऑपरेशन ‘मेरी सहेली’ के तहत आरपीएफ टीमों ने 87,366 महिला यात्रियों को सहायता प्रदान की है। अभियान का उद्देश्य अकेले सफर कर रही महिलाओं से यात्रा के दौरान संपर्क बनाए रखना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी परेशानी की स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराना है।
मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल के दिशा-निर्देशन और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त एस. रामकृष्णन के निर्देशन में अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत आगरा मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों में महिला आरपीएफ कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है।
रेलवे के अनुसार, लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले यात्रा कर रही महिला यात्रियों की जानकारी प्रारंभिक स्टेशन से ही संबंधित अगले नामित स्टेशनों पर RPF की महिला टीमों को उपलब्ध कराई जाती है। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही ‘मेरी सहेली’ टीम कोच में जाकर महिला यात्रियों से संपर्क करती है।
महिला यात्रियों से उनकी यात्रा, सुरक्षा और किसी संभावित परेशानी के बारे में जानकारी ली जाती है। यदि कोई महिला किसी यात्री के व्यवहार, छेड़छाड़ या अन्य परेशानी की शिकायत करती है तो RPF तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
‘मेरी सहेली’ अभियान को महज सुरक्षा जांच तक सीमित नहीं रखा गया है। जरूरत पड़ने पर महिला यात्री को सुरक्षित स्थान या सीट तक पहुंचाने, स्टेशन पर सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराने और आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता दिलाने में भी RPF मदद करती है।
इसके अलावा RPF के ‘ऑपरेशन SEWA’ के तहत जरूरतमंद यात्रियों को व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, चिकित्सा सहायता और आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि ‘मेरी सहेली’ का मकसद महिला यात्रियों को यह भरोसा दिलाना है कि ट्रेन में अकेले सफर करते समय वे खुद को असहाय न समझें। RPF की महिला टीम यात्रा के दौरान उनके संपर्क में रहती है और जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए मौजूद रहती है।
चार महीनों में 87 हजार से अधिक महिला यात्रियों तक पहुंच इस अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ऐसे में ‘मेरी सहेली’ सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि ट्रेन में सफर करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा के साथ भरोसे का संदेश भी बनती जा रही है।