हर-हर महादेव के जयकारों के बीच हुक्के के धुएं के छल्ले; आगरा में वायरल वीडियो से उठे सवाल, कार्रवाई की मांग

Agra Sawan Parikrama: सावन की महादेव परिक्रमा के दौरान हुक्का पीते युवाओं का कथित वीडियो वायरल हुआ है। राजपुर चुंगी के पास हुक्का स्टॉल के दावे से आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
Agra Viral Video of Hookah Use During Sawan Parikrama Sparks Debate Over Faith and Youth Culture
हुक्का पीते युवा(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Agra Hookah Video During Sawan Parikrama: सावन का महीना... चारों ओर भोलेनाथ की भक्ति... मंदिरों में घंटियों की गूंज और गलियों से लेकर परिक्रमा मार्ग तक सिर्फ एक ही जयकारा- हर-हर महादेव!

ताज नगरी आगरा का महादेव से पुराना धार्मिक नाता है। शहर के चारों दिशाओं में भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर हैं और सावन में श्रद्धालु इन मंदिरों की परिक्रमा कर भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने निकलते हैं। हजारों श्रद्धालु पैदल परिक्रमा करते हुए भगवान शिव का नाम जपते हैं और रास्ते भर भक्ति का माहौल दिखाई देता है।

भक्ति, युवा संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

लेकिन इसी आस्था के बीच सामने आए एक वीडियो ने भक्ति, युवा संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था- तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शमशाबाद रोड स्थित राजपुर चुंगी के आसपास का बताया जा रहा है जहाँ पर एक स्टॉल नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यहां पर परिक्रमा मार्ग से गुजर रहे युवाओं के लिए हुक्का उपलब्ध कराया जा रहा था। वीडियो में कुछ युवा हुक्का पीते और धुएं के छल्ले उड़ाते नजर आ रहे हैं।

एक तरफ हर-हर महादेव के जयकारे, दूसरी तरफ हुक्के का धुआं

एक तरफ सड़क पर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे और दूसरी तरफ हुक्के का धुआं - यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

सवाल सिर्फ हुक्का पीने का नहीं है। सवाल उस जगह और उस माहौल का है, जहां हजारों लोग आस्था लेकर महादेव की परिक्रमा करने पहुंचते हैं। क्या धार्मिक आयोजनों और परिक्रमा मार्गों को भी अब ऐसी गतिविधियों का स्थान बनाया जाना चाहिए?

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लोगों का कहना है कि युवाओं के बीच बदलती जीवनशैली और पश्चिमी संस्कृति की नकल को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। हालांकि आधुनिकता अपनाना अलग बात है, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े आयोजनों के बीच नशे या धूम्रपान को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां शुरू होना निश्चित तौर पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर परिक्रमा मार्ग पर ऐसे स्टॉल की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी? यदि स्टॉल नियमों के विपरीत लगाया गया था तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

फिलहाल वायरल वीडियो ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है- महादेव की परिक्रमा श्रद्धा और संस्कारों का रास्ता है... क्या इस रास्ते पर अब भक्ति के साथ हुक्के का धुआं भी दिखाई देगा?

प्रशासन के सामने भी चुनौती यही है कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।

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