

Agra Jama Masjid Controversy: ताजमहल को लेकर गंगाजल अर्पण और दंडवत परिक्रमा से लेकर तिरंगा यात्रा तक लगातार आंदोलनों के जरिए सुर्खियों में रहने वाली अखिल भारत हिंदू महासभा ने अब आगरा की शाही जामा मस्जिद को लेकर अपना रुख और आक्रामक कर दिया है।
जन्माष्टमी के अवसर पर जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे भगवान श्रीकृष्ण के प्राचीन विग्रह दबे होने के दावे को लेकर हिंदू महासभा ने आधी रात वहां पहुंचकर आरती करने का ऐलान किया था। इसे देखते हुए पुलिस-प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। हिंदू महासभा के इस हट को लेकर जामा मस्जिद पर भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
कृष्ण जन्मोत्सव की रात करीब 12 बजे हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अज्जू चौहान रावतपाड़ा स्थित बाबा मनकामेश्वर नाथ मंदिर से घंटे-घड़ियाल और प्रज्वलित दीप लेकर जामा मस्जिद की ओर रवाना हुए। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। अज्जू चौहान ने काफी देर तक जामा मस्जिद पहुंचकर आरती करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे और दीप अर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मी अपना कर्तव्य निभा रहे और हिंदू महासभा अपना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन यहीं समाप्त होने वाला नहीं है।
अज्जू चौहान ने कहा कि हिंदू महासभा का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मथुरा स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को आगरा लाकर जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबवा दिया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इतिहास की पुस्तकों में भी संदर्भ मिलते हैं और हिंदू महासभा इसी विग्रह की आरती करने के लिए जामा मस्जिद पहुंचना चाहती थी।
उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब आगे बढ़ेगा और हिंदू महासभा इसे पूरा कराने का प्रयास करेगी। उनका कहना था कि पुलिस की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन संगठन अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगा।
हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर ने कहा कि पुलिस ने फिलहाल उन्हें रोक दिया है, लेकिन संगठन यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि हर साल और हर बार भगवान केशवदेव के विग्रह को मुक्त कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने इसे आंदोलन की शुरुआत बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इसे और आगे बढ़ाया जाएगा।
जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे केशवदेव के विग्रह दबे होने का दावा केवल आंदोलन तक सीमित नहीं है। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित सेवा ट्रस्ट’ की ओर से आगरा की सिविल कोर्ट में इस संबंध में वाद दायर किए जाने की बात सामने आई है। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 1670 में मथुरा के प्राचीन केशवदेव मंदिर को ध्वस्त किए जाने के बाद वहां के श्रीकृष्ण विग्रह और बहुमूल्य रत्न आगरा लाए गए तथा जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबवा दिए गए।
याचिका में इस दावे के समर्थन में इतिहासकारों और पुरातत्वविद् अलेक्जेंडर कनिंघम के ऐतिहासिक संदर्भों का भी हवाला दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, विग्रहों के वर्तमान में जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे मौजूद होने का दावा में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही साफ होगा और इसका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया से ही संभव है।
जन्माष्टमी की रात जामा मस्जिद की ओर हिंदू महासभा के कूच और पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद आगरा में यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।