FSDA की छापेमारी से मचा हड़कंप, आगरा के रिहायशी कमरे में दो करोड़ से ज्यादा की दवाओं का जखीरा बरामद

Agra FSDA Raid: धनौली में एफएसडीए और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में रिहायशी कमरे से दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत का दवा स्टॉक बरामद हुआ। मौके पर दवाओं की पैकिंग करते एक युवक को हिरासत में लिया गया है।
Agra FSDA Raid: Medicines Worth Over ₹2 Crore Recovered From Residential Room in Dhanoli
दवाओं का जखीरा (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Agra Fake Medicine Stock: आगरा एक ऐसा शहर जो वैश्विक पर्यटन नगरी है। ताज महल के दीदार के लिए जहाँ लोग तमाम हसरते लेकर पहुंचते हैं... आगरा ताज के लिए ही नहीं बल्कि ऐसे कारनामों के लिए तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है जिससे शहर की साख पर बट्टा लगता दिखाई दे रहा है।। आगरा दवा मंडी के लिए विख्यात है, वही दवा जो हर मर्ज को दुरुस्त करने का काम करती है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यही दवा लोगों के लिए काल साबित हो रही है क्योंकि बड़े पैमाने पर दवा नकली बनाई जा रही हैं।

चंद पैसों की खातिर दवा कारोबारी नकली दवा बना कर व्यापक रूप से उन्हें बाजार में खपाने का काम कर रहे हैं, जो लोगों की मर्ज ठीक करने की जगह और उसे विकराल बना रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस के साथ मिलकर मलपुरा क्षेत्र के आवासीय परिसर में दवा की एक बड़ी खेप पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस भी इस दवा खेत के मिलने के बाद हैरान और दंग है क्योंकि दावों की मात्रा और उसकी कीमत हैरान करने वाली है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 2 करोड़ से अधिक की नकली दवाएं जप्त की गई हैं।

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ताजनगरी में दवाओं के कारोबार को लेकर मंगलवार को हुई एफएसडीए की कार्रवाई ने एक बड़े सवाल को जन्म दे दिया है- आखिर रिहायशी इलाके के एक कमरे में दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत का दवा स्टॉक कैसे पहुंचा और इसकी सप्लाई कहां होनी थी? धनौली में तीन छतरी के पास एक कमरे में दवाओं के भंडारण और पैकिंग की सूचना पर एफएसडीए की टीम ने सुबह करीब नौ बजे छापा मारा। कमरे की तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में दवाओं की पेटियां मिलने से टीम भी हैरान रह गई। मौके पर दवाओं की पैकिंग करता एक युवक मिला, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।

कमरे में मिलीं दवाओं की दर्जनों पेटियां

एफएसडीए टीम ने सूचना के आधार पर कमरे की घेराबंदी कर जांच शुरू की। तलाशी आगे बढ़ने के साथ ही कमरे में दवाओं की बड़ी मात्रा सामने आती गई। प्रारंभिक आकलन में बरामद स्टॉक की कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। मौके से केटोरोल, कोडेस, एलेग्रा, एलेग्रा-एम, लॉसर-एच और जुलर समेत अलग-अलग दवाओं की पेटियां मिली हैं।

अब विभाग प्रत्येक दवा के बैच नंबर, पैकिंग, निर्माण और समाप्ति तिथि के साथ उसके स्रोत और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है।

असली सवाल - कहां से आया इतना बड़ा स्टॉक?

कार्रवाई के बाद औषधि विभाग की जांच का दायरा कमरे में मिले स्टॉक से आगे बढ़ गया है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं किस फर्म या व्यक्ति के नाम पर खरीदी गईं। इनका भुगतान किस माध्यम से हुआ, स्टॉक किसके लिए मंगाया गया और इसे आगे कहां भेजा जाना था - इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।

दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित बिल, इनवॉयस, स्टॉक रजिस्टर, लाइसेंस और अन्य दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।

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रिहायशी कमरे में पैकिंग ने बढ़ाए सवाल

जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि जिस कमरे में दवाएं रखी गई थीं, वहां उनकी पैकिंग का काम क्यों किया जा रहा था। मौके पर एक युवक को दवाओं की पैकिंग करते पाया गया। एफएसडीए अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि पैकिंग किस उद्देश्य से की जा रही थी और इसके लिए आवश्यक नियमों व अनुमति का पालन किया गया था या नहीं।

दवाओं की लेबलिंग, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि समेत पैकेजिंग से जुड़े विवरणों की भी जांच की जा रही है।

लखनऊ से लेकर तीन जिलों की टीमें जुटीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय कार्रवाई की जानकारी लखनऊ स्थित विभागीय अधिकारियों को दी गई। इसके बाद फिरोजाबाद और हाथरस से औषधि विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। कई टीमों ने कमरे में मिले दवा स्टॉक और दस्तावेजों की जांच की।

हिरासत में लिए गए युवक से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का फोकस यह जानने पर है कि कमरे में रखी दवाओं से जुड़े कारोबारी, फर्म और सप्लाई चैन कौन-कौन से हैं।

जांच रिपोर्ट बताएगी दवाओं की असली तस्वीर

फिलहाल विभाग दवाओं के स्रोत, खरीद के दस्तावेज, पैकिंग, लाइसेंस और गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहा है। आवश्यकता के अनुसार नमूने लेकर उनकी जांच भी कराई जा सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी कमरे में दो करोड़ रुपये से अधिक का दवा स्टॉक आखिर किस कारोबार का हिस्सा था? एफएसडीए की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में केवल नियमों के उल्लंघन का प्रश्न है या इसके पीछे दवाओं की कोई बड़ी सप्लाई चेन भी सामने आती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अनियमितता मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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