नागपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर दीक्षाभूमि, जानें इससे जुड़ा इतिहास

Deekshabhoomi: नागपुर में घूमने के लिए प्रसिद्ध जगह दीक्षाभूमि को हर कोई जानता है जहां पर बौद्ध धर्म के लोग जाना ज्यादा पसंद करते हैं। यह जगह अपने आप में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखती है।
नागपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर दीक्षाभूमि, जानें इससे जुड़ा इतिहास
दीक्षाभूमि नागपुर (सौ. सोशल मीडिया)
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नागपुर में किसी भी जगह घूमने की बात आती है तो सबसे पहले दीक्षाभूमि का ही ख्याल आता है। यह एक ऐतिहासिक जगह है जिसका महत्व आज भी बना हुआ है। इस जगह पर लोग भीमराव अंबेडकर के स्मारक को नमन करने के लिए आते हैं। यह जगह भारत के इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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दीक्षाभूमि वह स्थान है जो अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। यहां पर 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब ने बौद्ध धर्म अपनाया था। अपने 5 लाख अनुयायियों को लेकर हिंदू धर्म का त्याग करते हुए दीक्षाभूमि में उन्होंने दीक्षा ली थी। यही कारण है कि यह जगह बौद्ध धर्म के लोगों के लिए अधिक महत्व रखती है।
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नागपुर में स्थित दीक्षाभूमि सिर्फ एक स्मारक नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति, आत्मसम्मान और धर्म परिवर्तन का प्रतीक है। यही वो जगह है जहां पर संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। हर साल यहां पर लाखों श्रद्धालुओं आते हैं और यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रेरणा का केंद्र है।
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दीक्षाभूमि की वास्तुकला और संरचना अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। यहां पर विशाल स्तूप है जो बौद्ध स्थापत्य शैली में बनाया गया है। इस जगह की मुख्य विशेषता यहां मौजूद सफेद रंग का विशाल गुंबद है जो वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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नागपुर की इस ऐतिहासिक जगह को संगमरमर और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से तैयार किया गया है। स्तूप के अंदर डॉ. अंबेडकर की बड़ी सी प्रतिमा स्थापित है जो उनके योगदान को दर्शाती है। इसके अलावा यहां पर पुस्तकालय और संग्रहालय भी है जहां पर आपको बौद्ध धर्म और डॉ. अंबेडकर के विचारों से जुड़ी चीजें भी देखने को मिलेंगी।
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हर साल लाखों श्रद्धालु 14 अक्तूबर को आकर यहां धम्मचक्र परिवर्तन मनाते हैं। यह स्मारक बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इसी जगह पर बाबासाहेब ने जाति व्यवस्था के खिलाफ संदेश दिया था। इस जगह पर आप जाकर आप इतिहास से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे।

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