पहले नौकरी या पहले परिवार? Zoho फाउंडर की सलाह से मची हलचल, लोगो को सोचने पर किया मजबूर

Zoho Founder Advice: आज का युवा करियर बनाने की होड़ में अपनी निजी जिंदगी को कितना पीछे छोड़ रहा है यह सवाल फिर से चर्चा में आ गया है। Zoho के फाउंडर, CEO श्रीधर वेम्बू ने पुराना वीडियो में खास कहा है।
Zoho Founder Advice Sparks a Stir On Career vs Family Debate
Zoho Founder (Source. Social Media/X)
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Zoho Founder Advice On Career vs Family Debate: आज का युवा करियर बनाने की होड़ में अपनी निजी जिंदगी को कितना पीछे छोड़ रहा है यह सवाल फिर से चर्चा में आ गया है। दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho Founder और CEO श्रीधर वेम्बू ने एक पुराना वीडियो शेयर कर इस बहस को हवा दे दी है। इस वीडियो के जरिए उन्होंने खासकर उच्च शिक्षा, जैसे PhD कर रहे युवाओं को यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या वे शादी और परिवार को टालकर सही कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में क्या कहा गया?

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह वीडियो सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली कुआन यू का है। इसमें वे एक PhD छात्रा से उसकी पढ़ाई और निजी जीवन को लेकर बातचीत करते नजर आते हैं। जब छात्रा बताती है कि उसकी पढ़ाई पूरी होने में अभी दो साल बाकी हैं, तो ली कुआन यू तुरंत कहते हैं: "कृपया समय बर्बाद न करें। यह शादी और बच्चे आपकी PhD से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वैसे आपको आपकी PhD और बॉयफ्रेंड के लिए शुभकामनाएं।" यह बयान अब नए सिरे से बहस का कारण बन गया है।

श्रीधर वेम्बू की सलाह: समय बर्बाद न करें

इस वीडियो को शेयर करते हुए Zoho Founder श्रीधर वेम्बू ने साफ कहा कि वे ली कुआन यू के विचारों से काफी प्रभावित रहे हैं। वेम्बू का मानना है कि आज भी युवाओं को समय रहते परिवार शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि दुनिया भर में गिरती जन्म दर भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। वेम्बू ने यह भी कहा कि समाज और अर्थव्यवस्था को इस तरह ढालना चाहिए कि महिलाएं अपने करियर और परिवार दोनों को संतुलित कर सकें। उनके विचार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की सोच से भी मेल खाते हैं, जो लगातार घटती जनसंख्या को मानवता के लिए गंभीर चुनौती बताते रहे हैं।

सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटी राय

वेम्बू की इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है। एक वर्ग का मानना है कि करियर के चक्कर में लोग शादी और बच्चों के लिए सही समय गंवा देते हैं। वहीं, दूसरा वर्ग इसे पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय बता रहा है। उनका तर्क है कि आज के महंगे दौर में घर बसाना और बच्चों की परवरिश करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है, इसलिए आर्थिक स्थिरता प्राथमिकता होनी चाहिए।

सही समय कौन सा है?

यह बहस एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जीवन में प्राथमिकता क्या होनी चाहिए करियर या परिवार? इसका जवाब हर व्यक्ति के हालात और सोच पर निर्भर करता है, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और गहराएगा।

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