

Meta Teen Accounts New Rules: आज के समय में सोशल मीडिया जितना आगे गया है उसको लेकर चिंता उतनी ही बढ़ गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर Meta ने बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि कंपनी ने घोषणा की है कि अब 13 वर्ष और उससे अधिक उम्र के टीन अकाउंट्स के लिए Instagram, Facebook और Messenger पर नई सुरक्षा सेटिंग्स को लागू कर दी गई हैं। इस नए सिस्टम को लेकर मेटा का दावा है कि इन बदलावों से युवाओं को बार-बार दिखने वाले और संभावित रूप से नुकसानदायक कंटेंट नहीं दिखेगे।
Meta ने अपने नए बदलाव को लेकर बताया है कि पिछले साल किए गए वादे के तहत अब सभी टीन अकाउंट्स पर डिफॉल्ट रूप से स्ट्रिक्ट कंटेंट कंट्रोल लागू किया जाएगा। वहीं बता दें कि कंपनी ने इन फीचर्स की जांच और स्ट्रेस टेस्टिंग के लिए ट्रस्ट एंड सेफ्टी कंपनी Alice जो पहले ActiveFence के नाम से जानी जाती थी के साथ काम किया। इसके अलावा कंपनी ने अपनी टेस्टिंग के बारे में लिखा, "डिफॉल्ट 13+ सेटिंग वाले इंस्टाग्राम टीन अकाउंट्स में कॉम्पिटिटर एप्स के टीन एक्सपीरियंस की तुलना में 68 परसेंट कम मैच्योर कंटेंट देखा गया। जिन जगहों पर इंस्टाग्राम टीन अकाउंट्स में मैच्योर कंटेंट दिखा भी, वह कॉम्पिटिटर्स और 13+ रेटिंग वाली फिल्मों में दिखने वाले मैच्योर कंटेंट की तुलना में कम इंटेंस था।"
इस नए सिस्टम में Meta सिर्फ आपत्तिजनक कंटेंट को सीमित नहीं कर रहा है बल्कि यह उन पोस्ट्स की भी टेस्टिंग कर रहा है जो किसी एक विषय को बार-बार यूजर्स के सामने लाते हैं। जिसके अंदर न्यूट्रिशन, वेटलिफ्टिंग और एंग्जायटी से जुड़े पोस्ट शामिल हैं। इस नए बदलाव को लेकर कंपनी का मानना है कि ऐसे कंटेंट को लगातार दिखाने के बजाय अलग-अलग विषयों के कंटेंट के साथ संतुलित किया जाना चाहिए ताकि टीनएजर्स पर किसी एक तरह के संदेश का ज्यादा असर ना हो।
मेटा के नए प्रयास को अब पूरी दुनिया देख रही है लेकिन इन प्रयासों पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। बता दें कि सितंबर में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेटा के कई प्रमुख टीन सेफ्टी फीचर्स वास्तविक परिस्थितियों में वैसा काम नहीं कर रहे जैसा कंपनी ने लोगों को बताया है। इसके अलावा Instagram टीन अकाउंट्स को लेकर PG-13 फिल्म रेटिंग्स से की गई तुलना पर भी Meta को परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन बाद में यह भी देखा गया कि Meta और MPAA के बीच इस मामले पर समझौता भी हुआ था।
इन सभी के बीच यह भी देखा गया कि सोशल मीडिया एडिक्शन से जुड़े ऐतिहासिक मुकदमों के बीच मेटा लगातार अपने सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने में लगा हुआ है। कंपनी पहले ही पैरेंटल सुपरविजन टूल्स और ग्लोबल एज डिटेक्शन जैसी सुविधाएं शुरू कर चुकी है। जिसके बाद नए बदलाव यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया अनुभव पहले से ज्यादा सुरक्षित और नियंत्रित हो सकता है।