AI चैटबॉट्स के ज्यादा इस्तेमाल से बढ़ सकता है अकेलापन, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि चैटबॉट्स के ज्यादा इस्तेमाल से लोगों में अकेलापन बढ़ सकता है और उनका सामाजिक मेलजोल कम हो सकता है।
Chatbox
Chatbox आपको अकेला बना रहा है। (सौ. Freepik)
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नवभारत टेक डेस्क: आजकल AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT के आ जाने से कई काम आसान हो गए हैं। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पतालों और कंपनियों समेत हर क्षेत्र में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, चैटबॉट्स का अधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि चैटबॉट्स के ज्यादा इस्तेमाल से लोगों में अकेलापन बढ़ सकता है और उनका सामाजिक मेलजोल कम हो सकता है। यह रिसर्च ChatGPT डेवलपर कंपनी OpenAI और MIT द्वारा की गई है।

AI चैटबॉट्स के ज्यादा इस्तेमाल के खतरे

इस अध्ययन में यह सामने आया कि जो लोग प्रतिदिन लंबे समय तक ChatGPT या अन्य AI चैटबॉट्स के साथ बातचीत करते हैं, वे भावनात्मक रूप से इस पर निर्भर हो जाते हैं। इससे उनका अकेलापन बढ़ता है और वास्तविक जीवन में लोगों से बातचीत करने में कठिनाई होने लगती है। रिसर्चर्स ने यह भी पाया कि जो लोग इंसानी रिश्तों में गहराई से जुड़े रहते हैं, वे जब AI चैटबॉट्स पर अधिक भरोसा करने लगते हैं, तो उनके अकेलेपन की भावना और बढ़ जाती है।

AI चैटबॉट्स को लेकर बढ़ रही चिंताएं

AI चैटबॉट्स का प्रभाव खासतौर पर युवाओं और मानसिक रूप से संघर्ष कर रहे लोगों पर अधिक देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस तकनीक को लेकर कई तरह की चिंताएं जताई जा रही हैं।

  • एक मामला 14 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या से जुड़ा है, जहां एक AI चैटबॉट पर बच्चे को खुद की जान लेने के लिए उकसाने का आरोप लगा था।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि AI पर फोकस करना जरूरी है, लेकिन इसका लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

AI चैटबॉट्स का भविष्य और जरूरी कदम

रिसर्चर्स का मानना है कि यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है और आगे इस पर और शोध किए जाएंगे। हालांकि, इस रिसर्च से यह साफ होता जा रहा है कि AI चैटबॉट्स के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर संतुलन बनाना जरूरी है।

AI का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस पर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है ताकि वे इसकी मदद तो लें, लेकिन वास्तविक जीवन में रिश्तों और सामाजिक संबंधों से कट न जाएं।

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