

Highlight:
Meta पर न्यू मैक्सिको की अदालत ने 25 अरब डॉलर की सिविल पेनल्टी लगाई है।
इस मामले में 2021 के Facebook के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।
2018 में सामने आए Cambridge Analytica को देखने के बाद केस दर्ज हुआ था।
Meta ने इस पेनल्टी के फैसले को चुनौती देने की बात कही है।
Meta $25 Billion Penalty: Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। बता दें कि न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी पर 25 अरब डॉलर यानी करीब ₹2.36 लाख करोड़ की सिविल पेनल्टी लगाई है। जिसमें यह मामला यूजर्स की प्राइवेसी, निजी डेटा के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी व नफरत फैलाने वाले कंटेंट को रोकने के कंपनी के दावों से जुड़ा है। वहीं इस फैसले की खास बात यह है कि इसकी जड़ें चर्चित Cambridge Analytica विवाद तक जाती हैं। लेकिन Meta इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कह चुकी है।
मामले के बारें में बताए तो न्यू मैक्सिको राज्य ने 2021 में Facebook के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। जिसमें राज्य का आरोप था कि कंपनी ने यूजर्स को उनके निजी डेटा के संग्रह, इस्तेमाल और थर्ड-पार्टी ऐप के साथ जानकारी साझा किए जाने को लेकर भ्रामक जानकारी दी है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी और हेट स्पीच को रोकने के प्रयासों से जुड़े कंपनी के दावों पर भी सवाल उठाए गए है।
वहीं 25 सितंबर 2026 को जूरी ने पाया कि कंपनी के 29 बयानों में से 26 भ्रामक थे। जिसके बाद जूरी ने न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कुल 43,899,725 उल्लंघनों के लिए Facebook को जिम्मेदार माना है। जिसको देखते हुए 21 अक्टूबर 2026 को अदालत ने 25 अरब डॉलर की पेनल्टी तय की है।
इस मामले को समझने के लिए 2018 में सामने आए Cambridge Analytica विवाद को याद करना जरूरी है। इस विवाद में आरोप लगा था कि थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए करीब 8.7 करोड़ Facebook यूजर्स की जानकारी हासिल की गई और उसका इस्तेमाल राजनीतिक विज्ञापनों को टारगेट करने के लिए किया जा रहा है।
वहीं न्यू मैक्सिको का मुकदमा केवल पुराने डेटा विवाद तक सीमित नहीं था। इसमें कंपनी के प्राइवेसी संबंधी बयानों और गलत जानकारी व नफरत फैलाने वाले कंटेंट से निपटने के दावों की भी जांच देखी गई है। साथ ही जूरी के फैसले ने बड़ी टेक कंपनियों की डेटा संबंधी जवाबदेही पर बहस फिर तेज कर दी है।
न्यू मैक्सिको के कानून के तहत हर जानबूझकर किए गए उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर तक की सिविल पेनल्टी लगाई जा सकती है। जिसको देखते हुए सभी उल्लंघनों पर अधिकतम रकम लगाने से संभावित जुर्माना 219 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकता था। लेकिन जज ने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। वहीं राज्य ने इससे अधिक पेनल्टी की मांग की थी जबकि Meta ने इतनी बड़ी रकम को अनुचित बताया है।
वहीं अब जानकारी में सामने आ रहा है कि Meta ने फैसले को चुनौती देने की बात कही है। इसलिए इस रकम को कंपनी से अंतिम रूप से वसूल की जा चुकी राशि समझना सही नहीं होगा। साथ ही अपील में फैसले और पेनल्टी की रकम पर दोबारा कानूनी बहस हो सकती है।
वहीं आम यूजर्स के लिए यह मामला एक अहम सबक है। जिसमें किसी ऐप को Facebook अकाउंट से जोड़ने से पहले उसकी परमिशन जांचना, गैर-जरूरी डेटा एक्सेस से बचना और समय-समय पर प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करना हर यूजर के लिए जरूरी है। साथ ही यह भी समझना होगा कि सोशल मीडिया पर साझा की गई निजी जानकारी कहां तक पहुंच सकती है क्योंकि यह डिजिटल सुरक्षा का जरूरी हिस्सा है।