BCCI अध्यक्ष बनेंगे अनुराग ठाकुर...संभालेंगे मिथुन मन्हास की कुर्सी? सुप्रीम कोर्ट ने हटाया 9 साल पुराना बैन

SC Lifts Ban On Anurag Thakur: सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत दी, BCCI पर लगा बैन हटाया और अब वह फिर से पदभार संभाल सकते हैं, जिससे भारतीय क्रिकेट प्रशासन में संतुलन लौटेगा।
Supreme Court Lifts Ban On Anurag Thakur
अनुराग ठाकुर (फोटो-सोशल मीडिया)
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Supreme Court Lifts Ban On Anurag Thakur: बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई के पद संभालने पर लगे प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त करते हुए बड़ी राहत दी है। अनुराग अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पदाधिकारी के तौर पर कार्यभार संभाल सकेंगे। हाल में ही बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप मिथुन मन्हास ने कुर्सी संभाली है। अब देखना होगा कि क्या फिर से अनुराग ठाकुर कोई पद मिलेगा या नहीं।

साल 2017 में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने की वजह से ठाकुर को पद से हटाया गया था। लोढ़ा कमेटी के नियमों में आयु सीमा और सरकारी पद जैसे कई कड़े प्रावधान शामिल थे। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा मोड़ ला सकता है।

BCCI की बैठकों में शामिल हो सकते हैं अनुराग ठाकुर

सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई में पद संभालने से लगा प्रतिबंध हटाते हुए साल 2017 में पारित अपने आदेश में संशोधन कर दिया। अब अनुराग ठाकुर बीसीसीआई से जुड़े कार्यों और बैठकों में शामिल हो सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में लगाया था प्रतिबंध

इस आदेश में अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई की आंतरिक गतिविधियों से अलग रहने का निर्देश था। अनुराग ठाकुर पर जब साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया था तब वो बीसीसीआई के अध्यक्ष थे। उस समय तत्कालीन चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अगुआई वाली बेंच ने आदेश जारी करते हुए अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई की गतिविधियों से दूर रहने का आदेश दिया था।

मौजूद चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने फैसले में किया संशोधन

अब मौजूदा चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने उस आदेश में संशोधन कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की बेंच ने अब अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के आंतरिक, प्रशासनिक और अन्य मामलों में भाग लेने की अनुमति दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जनवरी 2017 में लगाया गया प्रतिबंध आजीवन अयोग्यता के रूप में नहीं दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसका इरादा आजीवन प्रतिबंध लगाने का नहीं था और न ही यह उचित है। अनुराग ठाकुर पहले ही बिना शर्त माफी मांग चुके हैं, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।

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