टीम इंडिया से पहले पाकिस्तानी जर्सी में खेले थे सचिन तेंदुलकर, पढ़ें 37 साल पुराना ये दिलचस्प वाकया

Sachin Tendulkar ने भारत से पहले पाकिस्तान के लिए खेला था मैच! 1987 में महज 13 साल की उम्र में इमरान खान की कप्तानी में की थी फील्डिंग। जानें मास्टर ब्लास्टर के करियर का यह अनसुना किस्सा।
sachin tendulkar in pakistan jersey
सचिन तेंदुलकर(Image- Social Media)
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Sachin Tendulkar Birthday: क्रिकेट की दुनिया में 'भगवान' का दर्जा पाने वाले सचिन तेंदुलकर का करियर अनगिनत उपलब्धियों से भरा है। हालांकि, उनके करियर का एक ऐसा पन्ना भी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि सचिन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में पाकिस्तान दौरे से की थी, लेकिन सच्चाई यह है कि वे उससे भी पहले पाकिस्तान की टीम के लिए मैदान पर उतर चुके थे। यह किस्सा साल 1987 का है, जब सचिन महज 13 साल के थे।

1987 में खेला गया था एक अनोखा मैच

दरअसल, 20 जनवरी 1987 को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक प्रदर्शनी मैच खेला जा रहा था। यह मुकाबला सीसीआई इलेवन और पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के बीच था। उस समय पाकिस्तानी टीम की कमान दिग्गज इमरान खान के हाथों में थी। उस मैच में मुंबई क्रिकेट संघ ने सचिन तेंदुलकर समेत कई उभरते हुए युवा क्रिकेटरों को भी बुलाया था, ताकि उन्हें बड़े खिलाड़ियों के साथ समय बिताने का मौका मिल सके।

इसलिए पहननी पड़ी पाकिस्तान की जर्सी

मैच के दौरान एक दिलचस्प वाकया हुआ। पाकिस्तान के स्टार खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर किसी कारणवश मैदान से बाहर चले गए। पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान को फील्डिंग के लिए कुछ खिलाड़ियों की कमी महसूस हुई। उन्होंने सीसीआई के कप्तान हेमंत करकरे से अतिरिक्त फील्डर की मांग की। ऐसा कहा जाता है कि उस समय मैदान पर पास ही खड़े 13 साल के सचिन तेंदुलकर ने झिझकते हुए मराठी में पूछा, "मी जाऊ का?" (क्या मैं जा सकता हूँ?)। कप्तान की अनुमति मिलने के बाद, सचिन तेंदुलकर पाकिस्तानी जर्सी पहनकर मैदान पर उतर गए और लगभग 25 मिनट तक फील्डिंग की। इस तरह वे भारत के लिए आधिकारिक रूप से खेलने से पहले ही पाकिस्तान की ओर से मैदान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके थे।

कपिल देव के कैच का रोमांचक वाकया

सचिन के लिए यह अनुभव बेहद खास था। इमरान खान ने उन्हें 'लॉन्ग-ऑन' पर तैनात किया था। उसी समय भारत के महान ऑलराउंडर कपिल देव ने एक ऊंचा शॉट मारा। सचिन ने उस कैच को लपकने के लिए करीब 15 मीटर की लंबी दौड़ लगाई। हालांकि, वे गेंद तक पहुँच नहीं पाए और कैच छूट गया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने प्रयास किया, उससे सभी खिलाड़ी काफी प्रभावित हुए। उनकी इस मेहनत और समर्पण की तारीफ खुद विपक्षी टीम के खिलाड़ियों ने भी की थी।

आपको बता दें कि इस घटना के ठीक नौ महीने बाद, सचिन 1987 के विश्व कप के दौरान बॉल-बॉय के रूप में अपनी भूमिका निभाते नजर आए। यह किस्सा आपको बताता है कि मास्टर ब्लास्टर में क्रिकेट के प्रति जुनून बचपन से ही कितना गहरा था।

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