पिता-भाई को खोया, बहन को कैंसर हुआ; ऐसी है आकाश दीप के संघर्ष की कहानी

आकाश दीप के लिए जिंदगी की मुश्किलें 16 साल की उम्र में शुरू हो गई थीं, जब उन्होंने अपने पिता रामजी सिंह को खो दिया। उनके पिता पेशे से एक स्कूल टीचर थे। उसके बाद उनकी बहन ने उनका साथ दिया।
पिता-भाई को खोया, बहन को कैंसर हुआ; ऐसी है आकाश दीप के संघर्ष की कहानी
आकाश दीप (फोटो-सोशल मीडिया)
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लखनऊ: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट मुकाबले में आकाश दीप जीत के नायक रहे। आकाश दीप ने एजबेस्टन में 10 विकेट चटकाए। इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में जीत के नायक आकाश दीप के क्रिकेटर बनने में उनकी बहन अखंड ज्योति का बड़ा योगदान रहा है, जो खुद अब कोलोन कैंसर के तीसरे चरण से जूझ रही हैं।

आकाश दीप ने 2015 में छह महीने के अंतराल में अपने पिता रामजी सिंह और अपने सबसे बड़े भाई को खो दिया था तब उनके क्रिकेट करियर पर संकट छा गया था। निराशा के उस क्षण में अखंड ज्योति ने अपने सबसे छोटे भाई के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित किया। उस समय उनकी बहन ने कहा था कि इसी फील्ड (क्षेत्र) में आगे बढ़े।

आकाश दीप ने चटकाए 10 विकेट

आकाश दीप ने मैच की पहली पारी में 88 रन देकर चार विकेट लेने के बाद दूसरी पारी में 99 रन देकर छह विकेट लेकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस तेज गेंदबाज ने अपने प्रदर्शन को मैच के बाद भावुक होकर अपनी बहन को समर्पित किया। इसके पीछे एक भावुक कहानी छिपी है।

कीमोथेरेपी पर है आकाश की बहन

अखंड ज्योति 14 मई को कोलन कैंसर की सर्जरी करवाने के बाद अब कीमोथेरेपी पर हैं। ज्योति के पति नितेश कुमार सिंह सेना से सेवानिवृत्त है और अब बैंक में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। पिता की मृत्यु के बाद आकाश दिल्ली में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे, लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिल रही थी। यह ज्योति ही थीं जिन्होंने उनसे कहा कि इसे गंभीरता से लो। अगर जरूरत पड़े तो कहीं और जाओ और इस सपने को पूरा करो।

2017 में आकाश कोलकाता चले गए थे

उन्होंने कहा कि वह 2017 में कोलकाता चले गए और फिर बंगाल अंडर-23 के लिए चुने गए। उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहीं से उनकी जिंदगी शुरू हुई। परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद कभी आकाश दीप पर भरोसा करना कम नहीं किया। सिंह ने कहा कि हमारे पास जो था, उसी से हम गुजर-बसर करते रहे। आकाश हमेशा अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व था।

आकाश से 10 साल बड़ी है उसकी बहन

उन्होंने कहा कि ज्योति आकाश दीप से 10 साल बड़ी है। पिता तथा भाई की मौत के बाद आकाश का अपनी बहन के साथ रिश्ता और भी गहरा हो गया। नितेश ने कहा कि वे सब कुछ साझा करते हैं। बात चाहे कोई फैसला लेने की हो, चुटकुले हो या ताने मारना हो। वे हमेशा एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

कीमोथेरेपी के दौरान भी अखंड ज्योति ने सुनिश्चित किया कि उसका भाई खेल पर ध्यान केंद्रित रखे। इंग्लैंड दौरे से पहले, परिवार आकाश को छोड़ने के लिए हवाई अड्डे गया, जहां उसकी बहन ने उससे कहा कि वह उसके स्वास्थ्य के बारे में चिंता न करे और देश के लिए अच्छा खेलने पर ध्यान केंद्रित करे।

मैच के तुरंत बाद आकाश का फोन आया

उन्होंने बताया कि वह हर दिन अपने भाई से बात करती है। सिंह ने कहा कि मैच खत्म होने के तुरंत बाद, आकाश दीप का फोन आया और उन्होंने उससे वीडियो कॉल पर बात की। हम कल रात लगभग दो बजे सोए। नितेश ने कहा कि जब भी आकाश विकेट लेता है तो ज्योति को बहुत खुशी होती है और परिवार इतनी जोर से ताली बजाता है और खुशी मनाता है कि उनके पड़ोसी भी पूछते हैं कि क्या हुआ है। एक बिहारी अंग्रेजों पर भारी, आकाश दीप इंग्लैंड में 10 विकेट लेने वाले…

आकाश दीप का प्रदर्शन बहन को जल्दी ठीक कर सकता है

उन्होंने कहा कि मां जी (आकाश की मां लदुमा देवी) भी उसकी (ज्योति) देखभाल के लिए मेरे साथ हैं। वह बहुत भावुक हो गई है। आकाश दीप के जीजा ने कहा अगर वह (आकाश दीप) इसी तरह प्रदर्शन करता रहा, तो इससे उसे मानसिक रूप से ठीक होने में मदद मिलेगी और उपचार अधिक प्रभावी होगा। उस पर कीमोथेरेपी का अच्छा असर हो रहा है और अब पहले से बहुत बेहतर है। (भाषा इनपुट के साथ)

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