

Ishan Kishan reply to Kirti Azad: भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। खिताबी जीत के बाद ट्रॉफी को अहमदाबाद के हनुमान मंदिर ले जाने को लेकर अब सियासी और खेल जगत में बहस भी छिड़ गई है। इस पूरे मामले पर भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया। भारत लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन गया है। इससे पहले रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने 2024 में खिताब जीता था, जबकि 2007 में एमएस धोनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पहला टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया था।
फाइनल जीतने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी अध्यक्ष जय शाह अहमदाबाद के हनुमान मंदिर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी भी थी। मंदिर में टीम की जीत के लिए पूजा-अर्चना की गई। हालांकि ट्रॉफी को मंदिर ले जाने को लेकर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए, जिनमें 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद भी शामिल हैं।
इस पूरे विवाद पर जब भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन से सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। मंगलवार को बिहार की राजधानी पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईशान ने कहा कि टीम की जीत पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करेंगे कि आगे भी टीम इसी तरह अच्छा क्रिकेट खेले और जीतती रहे। कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देने से बचते हुए ईशान ने कहा "टीम जीती है, यह ना सिर्फ हमारे लिए बल्कि पूरे देश के लिए अच्छी बात है। हम लोग उम्मीद करेंगे कि अच्छा क्रिकेट खेलते रहें और जीतते रहें।"
दरअसल कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए टीम इंडिया की आलोचना की थी। उन्होंने लिखा कि टीम इंडिया की ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थल पर ले जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जब भारत ने विश्व कप जीता था, तब टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी थे और ट्रॉफी पूरे देश की थी। कीर्ति आजाद ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ट्रॉफी मंदिर ले जाई जा रही है तो फिर मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं। उनका कहना था कि यह ट्रॉफी 140 करोड़ भारतीयों की है और इसे किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।