'शहीद हमेशा अमर रहते हैं', गंभीर और हरभजन ने Jallianwala Bagh के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Jallianwala Bagh: जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी पर गौतम गंभीर और हरभजन सिंह ने श्रद्धांजलि दी, जिसमें 1919 की दर्दनाक घटना और स्वतंत्रता संग्राम की यादें ताज़ा की गईं।
Jallianwala Bagh Victims
जलियांवाला बाग (फोटो-सोशल मीडिया)
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Jallianwala Bagh Victims: आज 13 अप्रैल, 2026 को जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी है, जो भारत की आजादी और संप्रभुता के संघर्ष का एक अहम और काला अध्याय रहा है। भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने जलियांवाला बाग में जान गंवाने वालों को विनम्र श्रद्धांजलि दी है।

भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी जलियांवाला बाग हत्याकांड में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने एक्स पोर्टल पर लिखा, "शहीद हमेशा अमर रहते हैं।" एक सदी से भी पहले आज ही के दिन 1919 में ब्रिटिश अधिकारियों के क्रूर कामों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा असर डाला था। इस दुखद घटना ने जनता के लिए एक जरूरी चेतावनी का काम किया, जिसने विदेशी क्रूरता की हद को दिखाया और आजादी की लड़ाई का रास्ता हमेशा के लिए बदल दिया।

हरभजन सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर लिखा, "जलियांवाला बाग हत्याकांड की याद में मैं हमारे देश के इतिहास के सबसे काले और दर्दनाक अध्यायों में से एक में खोई अनगिनत बेगुनाह जिंदगियों के लिए गहरी श्रद्धा से सिर झुकाता हूं। यह दुखद घटना सिर्फ क्रूरता का काम नहीं थी बल्कि यह भारत की आत्मा पर एक घाव था। फिर भी उस दर्द से एक मजबूत इरादा, एकजुट आवाज और गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का पक्का इरादा निकला। आज, जब हम उन्हें याद करते हैं, तो हमें अपनी आजादी की असली कीमत याद आती है। बहादुर आत्माओं को हमेशा शांति मिले। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।"

बैसाखी के दौरान हुआ था Jallianwala Bagh हत्याकांड

यह घटना बैसाखी के त्योहार के दौरान हुई थी, जब हजारों लोग त्योहार को मनाने के लिए अमृतसर के जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। ये सभी लोग इस बात से अनजान थे कि ब्रिटिश सरकार द्वारा जलियांवाला बाग में सभा करने या एकत्रित होने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके बाद, ब्रिटिश सेना के ब्रिगेडियर रेजिनाल्ड डायर अपने सैनिकों के साथ यहां पहुंचे और उन्होंने गोली बरसाने का आदेश दे दिया था।

Jallianwala Bagh हत्याकांड में हुई थी 1,650 राउंड फायरिंग

इस हत्याकांड में माना जाता है कि एक हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ब्रिटिश सैनिकों द्वारा 1,650 राउंड फायरिंग की गई थी, जिसमें 1200 से अधिक लोग घायल भी हुए थे। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस हत्याकांड में 379 मौतें हुईं थीं।

100 वर्षों से भी पहले आज ही के दिन अमृतसर में 1919 में ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों की इस क्रूरता ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा असर डाला था। इस त्रासदी ने जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी का काम किया, जिसने विदेशी शासन की क्रूरता को उजागर किया और आजादी की लड़ाई का रास्ता हमेशा के लिए बदल दिया।

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