IPL 2026 से पहले MS Dhoni को मिली बड़ी राहत, BCCI के एथिक्स ऑफिसर ने शिकायतों को किया खारिज; जानें पूरा मामला

BCCI Ethics Officer Dismisses Complaint: धोनी से जुड़ी क्रिकेट अकादमी मामले में एथिक्स ऑफिसर ने कहा कि समझौता 2017 में हुआ था, इसलिए हितों का टकराव नहीं बनता। निजी विवाद जैसी शिकायत को खारिज किया गया।
BCCI Ethics Officer Dismisses Conflict Of Interest Complaint Against MS Dhoni
एम एस धोनी (फोटो-सोशल मीडिया)
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MS Dhoni News: आईपीएल 2026 से पहले महेंद्र सिंह धोनी को बड़ी राहत मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के एथिक्स ऑफिसर, जस्टिस अरुण मिश्रा ने भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ दर्ज की गई हितों के टकराव की शिकायत खारिज कर दी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा है कि बोर्ड के नियमों के तहत किसी भी उल्लंघन का कोई सबूत नहीं है।

फरवरी 2024 में फाइल की गई शिकायत में दावा किया गया था कि धोनी, मौजूदा खिलाड़ी होने के साथ एक क्रिकेट एकेडमी के मालिक भी थे। इस स्थिति ने कथित तौर पर बीसीसीआई के कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट (हितों का टकराव) नियमों के रूल 38(4)(ए) और रूल 38(4)(पी) को तोड़ा। शिकायत में उन पर 2018 में नियम बदलने के बाद रूल्स 38(2) और 38(5) के तहत डिस्क्लोजर की जरूरतों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था।

जस्टिस मिश्रा ने इस केस में क्या कहा?

जस्टिस मिश्रा ने अपने आदेश में कहा कि महेंद्र सिंह धोनी को उस क्रिकेट अकादमी का मालिक माना जा सकता है जिसे आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड चला रही है। हालांकि, इस अकादमी के लिए समझौता वर्ष 2017 में हुआ था, जबकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट से जुड़े नियम सितंबर 2018 में लागू हुए थे। इसलिए जब धोनी भारत के लिए कप्तान या खिलाड़ी के रूप में खेल रहे थे, उस समय हितों के टकराव की स्थिति नहीं बनती थी।

निजी विवाद के कारण किया गया केस

एथिक्स ऑफिसर ने यह भी कहा कि शिकायत करने वाला व्यक्ति किसी वास्तविक नियामकीय चिंता के बजाय अपने निजी विवाद को आगे बढ़ा रहा था। मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि धोनी के पास अकादमी पर संस्थागत नियंत्रण या फैसले लेने की विशेष शक्ति थी, या उन्होंने किसी के साथ पक्षपात या विशेष व्यवहार किया हो। आदेश में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता किसी तीसरे पक्ष की ओर से यह मामला नहीं उठा सकता और उसका प्रतिवादी के साथ निजी विवाद है। साथ ही यह मामला एक व्यावसायिक विवाद जैसा प्रतीत होता है और शिकायत भी काफी देर से दर्ज की गई थी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए शिकायत को खारिज कर दिया गया।

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