वोटर भी हैं ह्यूमन बीइंग, चुनाव में आम बात हो गई क्रॉस वोटिंग

Nishanebaaz
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पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग हो गई. कुछ सदस्यों का ऐसा करना पार्टी अनुशासन के खिलाफ है. यह दगाबाजी नहीं है तो और क्या है? ऐसा विश्वासघात क्यों होता है? 

हमने कहा, ‘‘व्यक्ति का मन बड़ा चंचल होता है. वोटर घर से निकलने के पहले सोचता है कि पार्टी या गठबंधन के उम्मीदवार को वोट दूंगा लेकिन मतपेटी के सामने आने पर विचार बदल जाता है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग हो जाती है. जिन संगठनों में कड़ा अनुशासन है और सिर्फ एक व्यक्ति का हुक्म चलता है, वहां लोग अपने दिमाग से फैसला नहीं लेते. वहां क्रॉस वोटिंग कभी नहीं होती. आदेश का विशेष रूप से पालन होता है.’’ 

पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज ‘‘क्रॉस के महत्व के नजरअंदाज मत कीजिए. कितने ही लोग उत्साह से क्रॉसवर्ड पजल या वर्ग पहेली भरते हैं इससे मानसिक व्यायाम होता है. सड़क से चलते समय चौराहा मिलता है जिसे स्क्वेयर या क्रॉसरोड कहा जाता है. रास्ते को हमेशा दाहिने-बाएं देखकर सावधानी से क्रॉस करना चाहिए. यदि कोई मर्यादा भंग करे या लक्ष्मण रेखा पार करे तो उसे अंग्रेजी में क्रॉसिंग दि लिमिट कहा जाता है. 

सीमा पार से आतंकवाद को क्रॉस बार्डर टेररिज्म कहा जाता है. हस्तरेखा विज्ञान या सामुद्रिक शास्त्र में क्रॉस चिन्ह का बड़ा महत्व है. हथेली पर यह निशान कहां है उसके मुताबिक उसका अच्छा या बुरा फल मिलता है. कितने ही लोग घर से निकलते समय यदि काली बिल्ली रास्ता क्रॉस कर जाए तो इसे अपशकुन मानते हैं. 

रेलवे क्रॉसिंग को भी संभल कर पार करना चाहिए. जब 2 पक्षों में मतभेद या विवाद हो तो एक्रॉस द टेबल बैठकर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाती है. टीचर जब आंसर बुक जांचता है तो सही उत्तर पर राइट और गलत जवाब पर क्रॉस लगा देता है.’’ 

हमने कहा, ‘‘ईसाइयों के लिए क्रॉस अत्यंत पवित्र चिन्ह होता है. चर्च में बड़ा सा क्रॉस होता है. फादर और नन गले में क्रॉस पहने रहते हैं. यदि क्रॉस की चारों भुजाओं पर चार दिशाओं की ओर लकीरें खींच दी जाएं तो हिंदुओं का पवित्र चिन्ह स्वस्तिक बन जाता है. चाहें तो करके देख लीजिए.’’

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