निशानेबाज: रूस के स्टालिन को थी हिंदी से मोहब्बत, तमिलनाडु के स्टालिन करते हैं नफरत

1924 में महान क्रांतिकारी लेनिन की मौत के बाद स्टालिन ने सोवियत यूनियन की सत्ता संभाल ली. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी ट्राटस्की को साइबेरिया में निष्कासित कर दिया।
तमिलनाडु के एम के स्टालिन क्यों करते हैं हिंदी से नफरत
तमिलनाडु के एम के स्टालिन क्यों करते हैं हिंदी से नफरत
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नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमें बताइए कि स्टालिन इन दिनों चर्चा में क्यों हैं? क्या उनका इरादा व्यवस्था में बदलाव लाने और टकराव पैदा करने का है?’ हमने कहा, ‘स्टालिन अतीत में थे और वर्तमान में भी हैं. पहले हम आपको रूस के तानाशाह रह चुके जोसेफ स्टालिन के बारे में बताते है. 1924 में महान क्रांतिकारी लेनिन की मौत के बाद स्टालिन ने सोवियत यूनियन की सत्ता संभाल ली. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी ट्राटस्की को साइबेरिया में निष्कासित कर दिया।

स्टालिन इसलिए मशहूर हुए क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध में हिटलर की जर्मन फौज को लेनिनग्राड की लड़ाई में रूस की सेना ने हरा दिया. जर्मनी के 3,30,000 सैनिक इस भयानक युद्ध में हताहत हुए. हिटलर को हरानेवाले रूसियों के सम्मान में ब्रिटेन के किंग जार्ज षष्टम ने एक तलवार भेजी जिसे तेहरान में ब्रिटिश पीएम चर्चिल ने स्टालिन को आदर सहित सौंपा था.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, इतिहास की बातें मत बताइए क्योंकि कहा गया है- हिस्ट्री-ज्याग्रफी बड़ी बेवफा, रात को रटी, सबेरे सफा!’ हमने कहा, ‘जब विजयालक्ष्मी पंडित भारत की राजदूत बनकर रूस गईं तो उनके अंग्रेजी में लिखे परिचयपत्र को स्वीकार करने से स्टालिन ने साफ मना कर दिया और पूछा कि क्या तुम्हारे आजाद देश की कोई अपनी भाषा नहीं है? उसमें अपना परिचयपत्र लेकर आओ।

आखिर हिंदी में लिखा परिचयपत्र लाने पर ही स्टालिन ने उसे स्वीकार किया था. यह बात तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बताई जानी चाहिए जो हिंदी का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने अपने बजट में रुपए के चिन्ह को भी तमिल चिन्ह में मनमाने तरीके से बदल दिया जबकि रुपए का अधिकृत चिन्ह तमिलनाडु के ही एक कलाकार ने बनाया था जिसे केंद्र सरकार ने पुरस्कृत किया था. वैजयंती माला, हेमा मालिनी और श्रीदेवी जैसी तमिल अभिनेत्रियों ने हिंदी फिल्मों में नाम कमाया।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता भी हिंदी फिल्म ‘इज्जत’ में धर्मेंद्र की हीरोइन रह चुकी थीं. तमिलनाडु के दिल्ली और उत्तरी राज्यों में काम करनेवाले आईएएस अधिकारी बहुत जल्दी हिंदी सीख लेते हैं. इतने पर भी राजनीतिक कारणों से एमके स्टालिन हिंदी का अंधविरोध कर रहे हैं. राजनीति जो न कराए सो थोड़ा!’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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