संपादकीय: जहां जरूरी वहां बुलडोजर, दंगाइयों के खिलाफ सख्ती आवश्यक

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कड़ा रुख सराहनीय है जिन्होंने कहा कि जितना नुकसान दंगाइयों ने किया है, उसका पूरा हिसाब निकाला जाएगा। इस नुकसान की सारी वसूली उनसे की जाएगी।
महाराष्ट्र में दंगाईयों के खिलाफ एक्शन जरूरी
महाराष्ट्र में दंगाईयों के खिलाफ एक्शन जरूरी (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: अराजकता फैलानेवाले तथा कानून की मट्टीपलीद कर सरकारी व निजी संपत्ति की तोड़फोड़ करनेवाले अमन के दुश्मन दंगाइयों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाना समय की मांग है. कानून का राज तभी कायम रहेगा जब उपद्रवियों में सरकार और पुलिस की दहशत हो और उन्हें मालूम हो कि पत्थरबाजी, आगजनी और लोगों पर हमला करने के बाद उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. इसलिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कड़ा रुख सराहनीय है जिन्होंने कहा कि जितना नुकसान दंगाइयों ने किया है, उसका पूरा हिसाब निकाला जाएगा।

इस नुकसान की सारी वसूली उनसे की जाएगी. यदि वह भरपाई नहीं करेंगे तो उनकी प्रापर्टी बेचकर पैसा वसूल किया जाएगा. जहां बुलडोजर चलाने की जरूरत होगी वहां चलेगा. जहां गलत काम होगा, उसे रौंदा जाएगा. पुलिस पर हमला करने और हाथ उठानेवालों को कदापि बख्शा नहीं जाएगा. उन पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई कर सजा दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने दृढ़ता के साथ गुंडा तत्वों से निपटने का संकल्प व्यक्त किया. जहां तक बुलडोजर के इस्तेमाल की बात है, यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसी तरीके से गुंडों, बदमाशों और डकैतों को दुरूस्त किया।

मध्यप्रदेश में शिवराजसिंह चौहान की सरकार के समय भी दुर्जनों व शातिर अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया. दूसरों का घर जलानेवाले, निजी वाहनों तथा सरकारी गाड़ियों व मशीनों को आग के हवाले करनेवाले दुष्टों को उनकी करनी का फल मिलना ही चाहिए. इसके बगैर उन्हें होश नहीं आएगा. सार्वजनिक संपत्ति चाहे वह सड़क व फ्लाईओवर बनने की मशीन क्यों न हो, जनता के पैसों की रहती है. ऐसी करोड़ों की मशीनों को जलाना और नष्ट करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

दंगाइयों की वजह से व्यापार ठप होने से करोड़ों का नुकसान हुआ. रोज मेहनत-मजदूरी व हमाली करनेवालों को फाका करने की नौबत आ गई. पुलिस सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों के निर्मूलन के लिए रहती है. खाकी वर्दीवालों पर हथियारों से हमला व महिला कांस्टेबल से ओछी हरकत करनेवालों को पहले ही इसका अंजाम मालूम रहना चाहिए था. देश में कानून से बड़ा कोई नहीं है. जो लोग दंगों की साजिश करते हैं और हिंसा व आगजनी पर उतर आते हैं उन्हें अपनी करनी का फल अवश्य भोगना पड़ेगा. राष्ट्र न्याय के शासन से चलता है. यहां हिंसक और अराजक तत्वों को न जनता बर्दाश्त करेगी न सरकार! शांति तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब उपद्रवियों पर नकेल कसी जाए. उन्हें तो बिल्कुल भी न बख्शा जाए जो उपद्रव और दंगों के मास्टरमाइंड या सूत्रधार हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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