नवभारत विशेष: फुटबॉल की दुनिया पर अब स्पेन की सल्तनत, अर्जेंटीना के इरादे नाकामयाब

Spain vs Argentina: 90 मिनट तक गोलरहित रहे वर्ल्ड कप फाइनल का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में हुआ। 106वें मिनट में फेरन टोरेस के निर्णायक गोल की बदौलत स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व कप खिताब जीता।
Navbharat Special: Spain now reigns over the football world; Argentina's ambitions thwarted.
स्पेन, अर्जेंटीना, वर्ल्ड कप फाइनल, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Spain World Cup Final: वर्ल्डकप फाइनल के 90 मिनटों में दोनों में से कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी थी। हालांकि स्पेन ने गेंद को गोल में डालने के लिए दर्जनों अवसर बनाए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमी मार्टिनेज ने फाइनल में रिकॉर्ड 11 बार सफल बचाव किया, जबकि लियोनल मेसी व उनके लड़कों को कोशिश करने का भी अवसर नहीं मिला, जिससे गेम पर ला रोजा की पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एक्स्ट्रा-टाइम के दूसरे हाफ में 39 सेकंड भी न बीते थे यानी 106 वें मिनट में पेड़ो पोरों ने लेफ्ट से आउट-स्विंगिंग क्रॉस बैंक पोस्ट की तरफ मारा, निको विलियम्स गेंद को हेड करके वापस स्पेस में डालने में कामयाब रहे और फेरन टोरेंस ने हाफ-वॉली को जाल में डाल दिया। डाइव लगाते हुए मार्टिनेज देखते रह गए। प्रतियोगिता में पेड्रो का यह एकमात्र गोल था और यही निर्णायक साबित हुआ, जो कि गोल करने का 20वां प्रयास था।

16 साल बाद फिर 1-0 से स्पेन बना विश्व विजेता

टोरेंस का यह विजयी गोल 19 जुलाई 2026 को ठीक 16 वर्ष व 8 दिन बाद आया था, जब एंड्रेस इनस्टा ने नीदरलैं के खिलाफ एक्स्ट्रा-टाइम में गोल करके 2010 में स्पेन को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया था। स्पेन की दूसरी खिताबी विश्व कप जीत भी 1-0 के अंतर से ही आई।

मैच के बाद टोरेंस ने अपने गोल के बारे में कहा, 'सच कहूं तो मैंने ज्यादा कुछ सोचा नहीं। मैंने गेंद को अपनी तरफ आते हुए देखा और मैंने सभी स्पेनी लोगों की पावर से शॉट लगा दिया।

' गर्मी व तेज धूप की वजह से पिच की घास सूख गई थी, जिसकी वजह से गेम में गति नहीं आ पाई और कलात्मक ड्रिबल करना भी कठिन रहा लेकिन इसके बावजूद स्पेन का गेंद पर कब्जा 65 प्रतिशत रहा और अर्जेंटीना को अपने बेहतर प्रतिद्वंदियों के सामने गेंद अपने पास रखने में कड़ा संघर्ष करना पड़ा, जो असफल अधिक रहा।

10 खिलाड़ियों के बावजूद नहीं टिक सका अर्जेंटीना

यह बात उस समय भी सही थी, जब दोनों तरफ से 11-11 खिलाड़ी मैदान में थे और ज्यादा मुश्किल उस समय हो गई, जब अर्जेंटीना के 10 ही खिलाड़ी रह गए थे, क्योंकि एंजो फर्नांडज ने दूसरी बार फाउल किया और रेफरी के पास कोई विकल्प न था कि उन्हें बेंच पर बैठा दिया जाए, स्पेन एकमात्र देश है जिसने दो बार यह कमाल किया कि यूरोपीय चैंपियनशिप जीतने के बाद फिर विश्व कप भी जीता। उसने यह कारनामा पहले 2008-2010 में किया और अब 2024 2026 में किया है। स्पेन पहला विश्व कप चैंपियन है, जिसने पूरी प्रतियोगिता में सिर्फ एक गोल खाया, इसलिए उसके गोलकीपर उनै साइमन को गोल्डन ग्लव से सम्मानित किया गया।

स्पेन का दबदबा, मेसी का चौथा खिताब सपना टूटा

गोल्डन बॉल स्पेन के रोड़ि को मिली। बेस्ट यंग प्लेयर भी स्पेन के पाव कबरसी रहे और फेयर प्ले अवार्ड नीदरलैं को मिला। तीन प्रमुख प्रतियोगिताएं- कोपा अमेरिकास (2021 व 2024) और विश्व कप 2024 लगातार जीतने के बाद मेसी की अर्जेंटीना चौथे फ्रंटियर पर नाकाम हो गई, विशेषकर इसलिए कि आठ बार बैलोन डी ओर जीतने वाले 39-वर्षीय मेसी, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में 8 गोल व 4 असिस्टस का श्रेय प्राप्त किया, को फाइनल में बामुश्किल ही गेंद को स्पर्श करने का अवसर मिला।

क्योंकि स्पेन का दबदबा ही कुछ ऐसा था। पूरे फाइनल में मेसी कभी भी ऐसे नहीं लगे कि वह अर्जेंटीना का खिताब बरकरार रखने में कामयाब हो जाएंगे। हालांकि वह एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने देश की कप्तानी लगातार तीन विश्व कप में की है, लेकिन फाइनल में वे वैसे प्रभावी खिलाड़ी नजर नहीं आए जैसे पहले दो विश्व कप और इस तीसरे विश्व कप के फाइनल से पहले थे। स्पेन ने अपनी गेंद पर कब्जा रखने वाले खेल से उतना ही बेबस कर दिया जितना उसने सेमीफाइनल में फ्रांस के एम्बापे को किया था।

अर्जेंटीना के इरादे नाकामयाब

प्रतियोगिता में 10 गोल व 4 अस्सिट्स के साथ एम्बापे ने मेसी को पछाड़ते हुए गोल्डन बूट अपने नाम किया। एम्बापे ने 2022 में भी गोल्डन बूट जीता था। एम्बापे विश्व के एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार दो बार गोल्डन बूट जीता है। फाइनल के बाद मेसी भावुक हो गए, उनकी आंखों से आंसू भी छलके, शायद इसलिए भी कि विश्व कप में यह उनका अंतिम मैच था।

-लेख-शाहिद ए चौधरी के द्वारा

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