नवभारत संपादकीय: चीन की नजर और भारत की चिंता, क्यों अहम है 'चिकन नेक'?

Chicken Neck Security: सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की रणनीतिक अहमियत फिर चर्चा में है। पूर्वोत्तर को देश से जोड़ने वाले इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
Navbharat Editorial: China's Gaze and India's Concern—Why is the 'Chicken's Neck' Crucial?
सिलीगुड़ी गलियारा, चिकन नेक,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Siliguri Corridor Strategic Importance: गाल की नई सरकार ने अत्यंत महत्वपूर्ण कदम दा उठाते हुए 120 एकड़ का संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारा केंद्र सरकार को हस्तांतरित कर दिया। यह अत्यंत संकरा क्षेत्र शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है और 'चिकन नेक' कहलाता है। इसकी हर कीमत पर रक्षा आवश्यक है। केंद्र सरकार के अधीन आ जाने के बाद वहां अत्यंत कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी और शत्रु देश कोई चाल नहीं चल पाएंगे। पूर्वोतर के तमाम राज्यों के लिए यह कॉरिडोर एकमात्र लिंक है।

सबसे बडा खतरा चीन से है जिसने चिकन नेक के आसपास अपनी सेना तैनात कर रखी है। 2017 में डोका ला त्रिकोण पर 73 दिनों तक भारत और चीन की सेना में टकराव की स्थिति बनी हुई थी। यहां भारत, तिब्बत व भूटान की सीमा एक दूसरे से लगी हुई है। तिब्बत चीन के कब्जे में है। इसलिए उसकी फौज की चिकन नेक पर गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। अब यहां सुरक्षा बलों का सीधा और पूरी तरह मजबूत नियंत्रण बना रहेगा।

चीनी सेना के जमाव के बावजूद भारत ने एक इंच भूमि भी उसके कब्जे में जाने नहीं दी थी क्योंकि यह संकरा गलियारा भारत की अखंडता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विगत कुछ वर्षों से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए काफी कदम उठाए हैं और साथ ही वहां की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश को पिछली अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने तो सीधे चीन को उकसाया था कि वह पूर्वोत्तर के भारतीय राज्यों पर कब्जा कर सीधे बांग्लादेश के बंदरगाहों का इस्तेमाल समुद्री व्यापार के लिए कर सकता है। चीन को अनुभव हो चुका है कि भारतीय सेना कितनी मजबूती से ड्टी हुई है।

गलवान घाटी की लड़ाई में चीनी सैनिकों को हमारे जवानों ने कड़ा सबक सिखाया था। बंगाल की शुभेदु अधिकारी सरकार ने बांग्लादेश से लगी सीमा पर कंटीले तार की फेन्सिंग लगाने के लिए जमीन भी दी है। देश की रक्षा व घुसपैठ रोकने के लिए यह सारे उपाय करना अत्यंत आवश्यक है। बंगाल की पिछली टीएमसी सरकार का रवैया केंद्र के साथ सहयोग करने वाला नहीं था लेकिन अब केंद्र व राज्य दोनों में बीजेपी सरकार रहने से राष्ट्र की सुरक्षा करने तथा अलगाववादी ताकतों पर अंकुश लगाने का काम किया जा रहा है। बांग्लादेश से लगी सीमा कुछ स्थानों पर खुली रहने से वहां से घुसपैठ होती आई है। अब कांटेदार बाड़ लगाने व निगरानी बढ़ाकर इसे सक्षमतापूर्वक रोका जाएगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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