संपादकीय: पार्टी तोड़ने की राजनीति में फिर से आया उफान

Local Body Election 2025: राज्य मंत्रिमंडल की बैठक का शिवसेना (शिंदे) ने नाराजगी से बहिष्कार किया। मित्रता व सहयोग ताक पर रखकर यह खेल चल रहा है।
पार्टी तोड़ने की राजनीति में फिर से आया उफान
पार्टी तोड़ने की राजनीति में फिर से आया उफान (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: निकाय चुनाव के पहले बीजेपी जिस तरह की शातिर चाल चल रही है, उसे देखते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का उद्विग्न होना स्वाभाविक है। कल्याण में उनके निकटवर्ती महेश शिंदे बीजेपी में शामिल हो गए। सहयोगी दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को जिस तरह बीजेपी में शामिल कर ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है उससे महायुति में मनमुटाव तीव्र हो गया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक का शिवसेना (शिंदे) ने नाराजगी से बहिष्कार किया। मित्रता व सहयोग ताक पर रखकर यह खेल चल रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पहले आप लोगों ने ही तोड़फोड़ की राजनीति की शुरूआत की थी। विवाद टालने के लिए एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में प्रवेश न दें। इस दौरान शिंदे ने दिल्ली जाकर गृहमंत्री अमित शाह से शिकायत की। राज्य में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और राकांपा (अजीत) के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग में मजबूत शिवसेना (शिंदे) को बीजेपी ठिकाने लगाने में जुट गई है। मुंबई महापालिका छोड़ दें तो ठाणे जिले का बहुत महत्व है। उसमें 6 महापालिका आती हैं। यह जिला आर्थिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है। ठाणे के अलावा कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भाईंदर, अंबरनाथ, नवी मुंबई व भिवंडी-निजामपुर जैसी महापालिकाओं में वर्चस्व के लिए दोनों पार्टियों में घमासान शुरू है।

पिछले 15 से 20 वर्षों के दौरान ठाणे जिले में एकनाथ शिंदे का एकाधिकार रहा है। अब इसे एक ओर से बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और दूसरी तरफ से वनमंत्री गणेश नाईक चुनौती दे रहे हैं। बीजेपी ने ठाणे जिले का चुनाव प्रभारी गणेश नाईक को बनाया है जिससे शिंदे का सिरदर्द बढ़ गया। रवींद्र चव्हाण लगातार शत प्रतिशत भाजपा का नारा दे रहे हैं। कल्याण-डोंबिवली में उनका गहरा प्रभाव है जहां वह बीजेपी को जिताना चाहते हैं। बीजेपी का कहना है कि लोकसभा में ठाणे की सीट शिवसेना (शिंदे) को दी गई इसलिए ठाणे का महापौर पद बीजेपी को मिलना चाहिए। दूसरी ओर मंत्री प्रताप सरनाईक बीजेपी से समझौता कर मीरा-भाईंदर मनपा पर कब्जा चाहते हैं।

अन्य 5 महापालिकाओं में बीजेपी ने शिवसेना (शिंदे) को चक्रव्यूह में फंसाना तय किया है। शिंदे भी कच्ची गोलियां नहीं खेले हैं। उनकी पार्टी राज्य में तीसरे नंबर पर है जिसके 7 सांसद और 57 विधायक हैं। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) एक-दूसरे की ताकत कम करने के प्रयासों में लगी हुई हैं। आपसी विश्वास व सहयोग की जगह शक ने ले ली है। जिस तरह कटुता बढ़ रही है उससे सरकार अस्थिर हो सकती है। एक-दूसरे के नेता-कार्यकर्ता अपनी ओर खींचने से राजनीति की अवसरवादिता सामने आई है। बीजेपी का प्रदेश कार्यालय प्रवेश कार्यालय की शक्ल लेता जा रहा है।

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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