Navbharat Nishanebaaz: हर किसी के मन में प्रश्न, झूमकर क्यों आता है सावन ?

Sawan Month: सावन का महीना आते ही चारों तरफ मस्ती छा जाती है। जानिए सावन सोमवार व्रत का महत्व, बॉलीवुड के सदाबहार सावन गीत और महाराष्ट्र में सावन की तारीखों में क्यों होता है अंतर।
sawan month significance traditions and famous sawan songs
नवभारत निशानेबाजडिजाइन फोटो
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Sawan Month Significance: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमें बताइए कि सावन झूमकर क्यों आता है? वह सीधी चाल चलते हुए आराम से भी तो आ सकता है । इतनी मस्ती दिखाने की क्या जरूरत है?'

हमने कहा, 'लगता है आपको धर्मेंद्र और आशा पारेख पर फिल्माया पुराना गीत याद आ गया जिसके बोल थे- बदरा छाए कि, झूले पड़ गए हाय कि मेले लग गए मच गई धूम रे कि आया सावन झूम के! सावन किसी भी तरह आ सकता है । राजश्री प्रोडक्शन ने फिल्म बनाई थी 'सावन को आने दो' । इससे लगता है मानो सावन को भी आने के लिए परमिशन चाहिए । वह हर साल बेधड़क बगैर किसी वीजा या पासपोर्ट के आता है । सावन के इफेक्ट को दर्शाने वाला गीत सुनील दत्त और नूतन पर फिल्माया गया था जिसके बोल हैं-सावन का महीना पवन करे सोर, जियरा रे झूमे ऐसे जैसे मन मा नाचे मोर! सुमन कल्याणपुर का एक क्लासिकल गीत है-गरजत बरसत सावन आयो रे, पिया नहीं आए! फिल्म चुपके-चुपके का गीत था- अब के सजन सावन में आग लगी जीवन में। 'नूरजहां' का गीत था- शराबी-शराबी ये सावन का मौसम !'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हिंदी भाषियों का सावन शुरू हो चुका है लेकिन महाराष्ट्र में सावन 2 सप्ताह देर से शुरू होता है । सावन सोमवार का व्रत कितने ही लोग श्रद्धापूर्वक करते हैं । किसानों में भी सावन उत्साह भर देता है क्योंकि इस महीने में बारिश अच्छी होती है जो फसलों के लिए जरूरी है । जलसंकट समाप्त हो जाता है । कुएं-तालाब भर जाते हैं ।हमारा सावन पहले आता है, अंग्रेजी कैलेंडर का सितंबर बाद में आता है ।'

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हमने कहा, - 'पहले गांव-देहात में आम या नीम के वृक्ष - की डाल पर झूला बांधा जाता था और महिलाएं उस पर झूलती थीं । आपने गीत सुना होगा- सावन के झूले पड़े, सैंयाजी हमें तुम कहां भूले पड़े ! अब शहरी जिंदगी में सावन की अहमियत कम हो गई है । जिन लोगों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आता, उनके बारे में कहा जाता है- सावन सूखे न भादों हरे ! एक कहावत भी है- सावन के अंधे को हरा-हरा सूझता है!'

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