Navabharat Nishanebaaz: अपनी लिमिट लांघते पैपराजी, सलमान की सही है नाराजगी

Salman Paparazzi Row: सलमान खान के पैपराजी पर भड़कने की घटना ने सेलेब्रिटी प्राइवेसी और संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है। दुख या निजी पलों में कैमरों की दखल पर सवाल उठ रहे हैं।
Navabharat Nishanebaaz: Paparazzi Crossing the Line—Salman's Anger Is Justified
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Salman Khan Paparazzi Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'अभिनेता सलमान खान उनका जबरन फोटो खींचने वाले पेपराजी पर भड़क उठे। उन्होंने कहा कि 60 साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला। हमने कहा स्वाभाविक बात है कि जब कोई सेलेब्रिटी या प्रसिध्द व्यक्ति परेशान दुखी या उदास हो तो उसका फोटो क्यों खींचना चाहिए? पैपराजी हर जगह धमक पड़ते हैं। ट्राफिक सिग्नल पर, एयरपोर्ट पर जहां भी फिल्म स्टार दिख जाएं, उनकी तस्वीर उतार ली जाती है। अब ऐसे सोशल मीडिया पर फोटो डालने वालों ने अस्पताल के पास डेरा डालना शुरू कर दिया है। किसी फिल्म स्टार का परिजन या मित्र अस्पताल में एडमिट हो और वहां उसे देखकर बाहर निकला हो तो पैपराजी उसे घेर लेते हैं। उन्हें किसी के दुख, तकलीफ या मानसिक पीड़ा से कोई मतलब नहीं है। उन्हें सिर्फ फोटो खींचने से मतलब है। ऐसा सनी देओल के साथ भी हुआ जब वह अस्पताल के आईसीयू में दाखिल अपने बीमार पापा धर्मेंद्र को देख कर बाहर निकल रहे थे। ऐसे में गुस्सा तो आएगा ही। उन्होंने भी पैपराजी को संयम बरतने और संवेदना रखने की सीख देते हुए फटकारा था।'

पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज हमने पहली बार पैपराजी शब्द को ब्रिटेन की प्रिंसेस डायना की दुर्घटना में मौत की खबर में सुना था। तब ब्रिटिश राजघराने की बहू डायना अपने प्रेमी डोडी फयाद के साथ मर्सिडीज कार से जा रही थी तभी पैपराजी ने फोटो खींचने के लिए अपनी गाडियों से उनका पीछा किया। उनसे बचने के लिए डोडी ने कार तेजी से दौड़ाई तो दुर्घटना हो गई और डायना व उनके प्रेमी की मौके पर मौत हो गई। यह घटना पेरिस में 31 अगस्त 1997 को हुई थी। किसी सनसनीखेज खबर व फोटो के लिए पैपराजी हमेशा ताक में रहते हैं। कभी वह टैबलायड पेपर या बुलेटिन के लिए यह काम करते थे। अब सोशल मीडिया की वजह से उनकी हरकतें और बढ़ गई हैं। उन्हें किसी की निजता या प्राइवेसी से कोई मतलब नहीं है। वह सिर्फ अपना टारगेट ढूंढते हैं। उसके दुख या आंसू भी उन्हें नही पिपलाते हमने कहा, 'प्रसिध्द होने की यही कीमत चुकानी पड़ती है। फैन और पैपराजी जीना हराम कर देते हैं। रेस्टोरेंट, जिम, अस्पताल हर जगह पीछा करते हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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