नवभारत संपादकीय: ब्रिटिश राजघराने की प्रतिष्ठा पर आंच

Andrew Epstein Royal Scandal: यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवाद में प्रिंस एंड्रयू पर शिकंजा कसता दिख रहा है। राजघराने की साख पर गहरा असर पड़ा है और मामले ने फिर वैश्विक सुर्खियां बटोरी हैं।
Navbharat Editorial: The reputation of the British royal family is in jeopardy
Prince Andrew Epstein ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Prince Andrew Epstein Case: आखिर यौन अपराधी एपस्टीन से जुड़े जाने-माने लोगों पर आशिकंजा कसना शुरू हो गया है। ब्रिटेन के राजघराने पर पहली बार इतना बड़ा संकट आया है जिसने उसको साख को मटियामेट कर दिया है। किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई पूर्व प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर को सैडिघम एस्टेट के वुड फार्म से गिरफ्तार करके पुलिस गुप्त स्थान पर ले गई।

जब भाई के दामन पर दाग लगा है तो किंग चार्ल्स भी क्या कर सकते थे। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करना चाहिए, इस प्रकरण की अनेक वर्षों से गूंज हो रही थी, 2019 में एपस्टीन के साथ अपने संबंधों से उपजे विवाद के बाद प्रिंस एंड्यू ने सार्वजनिक दायित्वों से खुद को अलग कर लिया था।

उन्होंने उन पर यौन शोषण का आरोप लगानेवाली वर्जीनिया म्यूक्रे से 2022 में अघोषित रकम देकर समझौता कर लिया था। उसी वर्ष एंड्रयू से उनकी सैनिक उपाधियां और हिज रायल हाइनेस की टाइटल छीन ली गई थी। न्यूफ़े ने गत वर्ष बदनामी व हताशा के चलते खुद‌कुशी कर ली थी जिससे एंड्रयू का नाम फिर चर्चा में आ गया।

उनपर सार्वजनिक पद पर रहते हुए दुराचार का आरोप है। किंग चाल्र्स ने कहा कि उचित अधिकारियों द्वारा उचित तरीके से निष्पक्ष रूप से इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए, ड्यूक ऑफ यॉर्क के रूप में 2001 से 2011 तक एंड्यू ने ब्रिटेन के विशेष वाणिज्य दूत का पद संभाला था।

उन्होंने अमेरिकी यौन अपराधी व फाइनांसर एपस्टीन को अपनी हांगकांग, वियतनाम व सिंगापुर यात्रा की गोपनीय ट्रेड रिपोर्ट सौंपी थी। इस प्रवास में वह एपस्टीन के सहयोगियों को साथ ले गए थे।

एपस्टीन फाइल में एंड्यू द्वारा 17 वर्षीय नाबालिग के यौन शोषण का जिक्र है। एंड्रयू की गिरफ्तारी के बारे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कोथ स्टारमर और गृहमंत्री शबाना महमूद को ही जानकारी थी।

पुलिस कार्रवाई के बारे में किंग चार्ल्स अथवा राज घराने के किसी भी सदस्य को पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। स्टारमर ने ही गत 1 फरवरी को एंड्रयू को अमेरिकी संसद में गवाही देने की नसीहत दी थी।

एक महिला ने भी आरोप लगाया था कि उसे एपस्टीन ने यौन संबंधों के लिए एंड्यू के पास ब्रिटेन भेजा था। इस तरह के आरोप सिद्ध होने पर एंड्रयू को आजीवन कैद की सजा सुनाई जा सकती है। यदि ज्यूरी की राय हो तो सजा कुछ कम हो सकती है।

एंड्रयू हमेशा कहते रहे कि उन्हें एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन फाइल के लाखों दस्तावेज जारी किए जाने के बाद 66 वर्षीय एंड्रयू उसकी बलि चढ़ गए, गत वर्ष जब एक किताब में उनकी एपस्टीन से निकटता का उल्लेख आया था तब किंग चार्ल्स ने एंड्यू की प्रिय उपाधि छीन ली थी और बकिंघम पैलेस से चले जाने को कहा था।

एंड्रयू को पुलिस 96 घंटे तक हिरासत में रखकर पूछताछ कर सकती है। लोकतंत्र के युग में भी ब्रिटेन में राजशाही (मॉनार्की) की संस्था मौजूद है लेकिन एपस्टीन दस्तावेज में एंड्रयू का नाम सामने आने से इस पर कलंक का साया मंडराने लगा है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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