

Modi Rahul Gandhi Students: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की छात्रों की गूंज तथा युवाओं से बढ़ते संवाद को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी छात्रों से सीधा संपर्क करने का प्रयास किया। वह दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दिन के उजाले की बजाय रात में गए और चुनिंदा छात्रों को संबोधित किया।'
हमने कहा, 'क्या पीएम ने शिक्षा, बेरोजगारी, पेपर लीक, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज व पैलेट गन दागने के बारे में कुछ कहा? क्या ज्वलंत सवालों का जवाब दे पाए?'
पड़ोसी ने कहा, 'वहां एबीवीपी के निष्ठावान छात्र जुटाए गए थे, पीएम ने जो कहा, वह श्रोताओं ने शांति से सुन लिया। वह दिन में इसलिए नहीं गए क्योंकि हंगामा और विरोध हो सकता था। अपनी सरकार को सुरक्षित या सेफ रखने के लिए कुछ तो करना ही पड़ता है। दिखाना तो पड़ेगा कि हम भी छात्रों व युवाओं में पैठ रखते हैं।'
हमने कहा, 'सुरक्षा या सेफ्टी की चिंता सिर्फ सरकार को नहीं होती। पुराने जमाने में लोग घर में मजबूत चौखट वाला मोटी लकड़ी का दरवाजा बनवाते थे, जो रात में संकल में लोहे की सलाख डालकर अंदर से बंद कर दिया जाता था। घर में लाठी या भाला भी रखा जाता था। अब शहरों में रहने वाले धनवान लोग खुद को सेफ रखने के लिए अपने बंगले की ऊंची चारदीवारी बनवाते हैं और वहां छुपकर रहते हैं। गेट पर गार्ड हमेशा तैनात रहता है, जो किसी व्यक्ति को वहां फटकने नहीं देता।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इस समय सुरक्षा या सेफ्टी नाम की चीज ही नहीं है। शहर में हेवी व तेज रफ्तार ट्रैफिक की वजह से जान हथेली पर रखकर रास्ता पार करना पड़ता है। फुटपाथ पर अतिक्रमण की वजह से सड़क किनारे पैदल चलना भी रिस्की है। मॉर्निंग वॉक मोहल्ले तक ही ठीक है। सड़क पर चलोगे तो पीछे से आने वाली गाड़ी ठोक देगी। बाइक सवार उठाईगीरे महिलाओं का मंगलसूत्र, गले की चेन, मोबाइल या पर्स झपट्टा मारकर रफूचक्कर हो जाते हैं। अच्छा-भला इंसान डॉक्टर के पास जाए तो वह समझाएगा कि आप बिल्कुल सेफ नहीं हैं।
एक छोटा-सा मच्छर मलेरिया, डेंगू या चिकनगुनिया का मरीज बना सकता है। डॉक्टर आपको हेपेटाइटिस, टाइफाइड की वैक्सीन लगाने को कहेगा। देश की राजधानी दिल्ली की हवा में भारी प्रदूषण व्याप्त है। वहां घने कोहरे और जहरीले धुएं में सांस लेने वालों के फेफड़े कैसे सुरक्षित रहेंगे? जब घर में घुसे चोर से सैफ अली खान भी सुरक्षित नहीं था तो हम कैसे सेफ रहेंगे !'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा