

PM Modi Mental Naxal Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, अब तक मंदबुद्धि लोगों को दिमागी तौर पर पैदल बताया जाता था, लेकिन मालूम पड़ा कि देश में दिमागी नक्सल भी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इनकी पहचान की है।
उन्होंने अपने से असहमत विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जंगलों में हथियारी नक्सल को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब दिमागी नक्सल से सावधान रहना होगा और उनकी पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना होगा। पीएम के इस कथन पर आपकी क्या राय है?'
हमने कहा, 'किसी के दिमाग में क्या ? चल रहा है, इसे मनोवैज्ञानिक या साइकिएट्रिस्ट भली-भांति समझ सकते हैं। इसके लिए नाकों टेस्ट भी लिया जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट या ब्रेन की सर्जरी करने वाला डॉक्टर भी ब्रेन स्कैन से इसका पता लगा सकता है। मोदी की तारीफ कीजिए कि उन्होंने बगैर सीटी स्कैन किए अपनी पारखी निगाह से दिमागी नक्सल को तुरंत पहचान लिया। जो भी व्यक्ति बीजेपी और एनडीए का विरोधी है और सरकार की नीतियों व कदमों की आलोचना करता है, वह पक्का दिमागी नक्सली है।
जिसके मस्तिष्क में हिंदुत्व की आस्था का प्रवाह, संघ की शाखा का अनुशासन, संस्कार व प्रतिबद्धता न हो और स्वतंत्र तरीके से सोचता हो, उसके दिमागी सर्किट में कहीं न कहीं भारी लोचा या गड़बड़ है। जो व्यक्ति नेहरू, इंदिरा की यादों में खोया रहता है अथवा मार्क्स व लेनिन के बारे में थोड़ी भी जानकारी रखता है और सेक्यूलर तरीके से सोचता है। वह जो गरीबों और बेरोजगार युवाओं के सवाल उठाता है, पेपर लीक का विरोध करता है। उसके ब्रेन की कंडीशनिंग सही तरीके से नहीं हुई है। ऐसे लोगों की नस्ल को दिमागी नक्सल ही कहना होगा।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, कुछ कहो तो तुरंत उसका परिणाम भी सामने आता है। सीजेआई ने युवा वकीलों को कॉकरोच कहा था, तो कॉकरोच जनता पार्टी बन गई। अब मोदी ने टिप्पणी की तो तत्काल दिमागी नक्सल पार्टी भी बन गई, जिसके लाखों फॉलोअर्स बन गए। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम व 'आप' नेता अरविंद केजरीवाल ने भी खुद को बुद्धिजीवी नक्सल घोषित कर दिया। अब आप हमारे बारे में कहेंगे कि बोलूंगा तो बोलोगे कि बोलता है, ऐसी पार्टी तब बनती है, जब लोगों का दिमाग खौलता है।'