नवभारत संपादकीय: फास्ट ट्रैक कोर्ट काफी नहीं, पेपर लीक रोकने को परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार जरूरी

Exam System Reform: पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट अहम कदम है, लेकिन स्थायी समाधान परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, सुरक्षा ऑडिट और जवाबदेही तय करने से ही संभव होगा।
Navbharat Editorial: Fast track court is not enough, major reforms are necessary in the examination system to stop paper leaks.
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Fast Track Courts Exams: पेपर लीक मामलों में दोषियों को यथाशीघ्र कड़ी सजा मिले, इस उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा गत 23 जुलाई को की, परंतु इस घोषणा को अंतिम उपाय न मानते हुए सिस्टम में व्यापक सुधार के एक भाग के रूप में देखना होगा। फास्ट ट्रैक या तीव्र गति न्यायालय की भूमिका अपराध होने के बाद शुरू होती है।

छात्रों का नुकसान पहले ही हो जाता है। पुनर्परीक्षा ली गई तो भी खोया हुआ समय वापस नहीं आता। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया सुरक्षित करनी होगी। परीक्षा कराने वाली संस्था की जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा ऑडिट करने, संदिग्ध व्यवहार करने वाले, दोषी अधिकारी या लॉजिस्टिक का काम निभाने वालों का दायित्व निर्धारित करना होगा।

पेपर लीक करने वालों को कितनी जल्दी सजा होती है, यह बात महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही यह भी देखना होगा कि पेपर लीक होने से रोकने की व्यवस्था कितनी सक्षम है। इसका समाधान परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार से ही निकलेगा।

पेपर लीक पर कानून पहले से सख्त, अब फास्ट ट्रैक कोर्ट की परीक्षा

सार्वजनिक परीक्षा में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 21 जून 2024 से ही लागू है। इसमें प्रश्नपत्र या उत्तरपुस्तिका लीक करने, परीक्षार्थी को अनधिकृत मदद देने, कंप्यूटर यंत्रणा में फेरबदल करने, फर्जी परीक्षा लेने तथा संगठित किस्म के शैक्षणिक भ्रष्टाचार में सजा का प्रावधान है।

इसलिए पेपर लीक के खिलाफ कानूनी ढांचा पहले से ही तैयार है। अब फास्टट्रैक कोर्ट ऐसे मामले तेजी से निपटाने का प्रयत्न करेगा। इतने पर भी देखना होगा कि पेपरलीक का मुख्य सूत्रधार जल्दी कानून के शिकंजे में आए और ठोस सबूतों के साथ अपराध सिद्ध हो जाए। अभियोजन मजबूती से पक्ष रखे तभी गुनहगारों को सजा हो सकेगी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के साथ तेज और मजबूत जांच भी जरूरी

पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के साथ ही जांच की गति व दर्जा भी महत्व रखता है। जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए सबूत, गवाह व आरोपपत्र के आधार पर अदालत को निर्णय लेना पड़ता है। यदि जांच में विलंब हुआ और आर्थिक लेन-देन की श्रृंखला खोजी नहीं की जा सकी तथा जांच मुख्य सूत्रधार तक नहीं पहुंची, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट होने पर भी अपेक्षित नतीजा नहीं निकलेगा।

पेपरलीक का स्वरूप आजकल जटिल हो गया है। प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन, डिजिटल प्रणाली, परीक्षा केंद्र, सेवा प्रदाता जैसे अनेक स्तरों का इसमें समावेश है। इसलिए गुनहगारों को पकड़ने के लिए पूरी श्रृंखला का भंडाफोड़ करने में सक्षम जांच एजेंसी व तकनीकी कौशल चाहिए, न्याय विभाग के डैशबोर्ड के अनुसार इस समय देश में 775 फास्ट ट्रैक कोर्ट कार्यरत हैं। यद्यपि इन अदालतों में जल्दी फैसला होता है तथापि बकाया मामलों की तादाद भी कम नहीं है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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