Navabharat Nishanebaaz: राजनीति में चूहे-बिल्ली का खेल, क्या विपक्ष में हो पाएगा मेल?

NDA Opposition Crisis: चूहे-बिल्ली की कहावत के जरिए विपक्ष और सत्तापक्ष की राजनीति पर व्यंग्य किया गया है। इसमें विपक्ष की चुनौतियों, दबाव की राजनीति और राजनीतिक दलों के बदलते समीकरणों पर कटाक्ष है।
Navabharat Nishanebaaz: A cat-and-mouse game in politics will the opposition manage to unite?
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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India Opposition Political Challenge: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, क्या आपको नहीं लगता कि आज की राजनीति चूहे-बिल्ली का खेल बनती जा रही है। विपक्षी पार्टियों के नेता इतनी धमाचौकड़ी मचा रहे हैं, लेकिन बीजेपी नेतृत्व के एनडीए के सामने पूरी तरह बेबस हैं। उनके सामने सबसे बड़ा प्रश्न है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा? इसके लिए आगे आने का दम किसमें है?'

हमने कहा, 'यह सवाल ही बेतुका है। क्योंकि घंटी गाय-बैल के गले में बांधी जाती है। हमने आज तक किसी बिल्ली के गले में घंटी बंधी नहीं देखी।'

प्रलोभन और राजनीतिक एकजुटता का सवाल

पड़ोसी ने कहा, 'बिल्ली के गले में घंटी बांधना एक कहावत है। चूहों ने विचार किया कि यदि बिल्ली के गले से घंटी लटका दी जाए तो उसके बजने से पता चल जाएगा कि वह उनका शिकार करने आ रही है। इससे उन्हें सतर्क होकर बच निकलने का मौका मिल जाएगा। आपने पुरानी फिल्म का बालगीत सुना होगा- छुपा-छुपी ए लो छुपी, आगड़-बागड़ जाई रे, चूहे मामा ओ मामा भाग बिल्ली आई रे!'

हमने कहा, 'बिल्ली शिकार करने से पहले चूहे को खिलाती है और फिर लपककर मुंह में दबा लेती है। विपक्षी दल भी घबराए हुए हैं। प्रलोभन और दबाव के जरिए उन्हें तोड़ा जाता है। जांच एजेंसियां उनके पीछे लग जाती हैं। राकां, शिवसेना और 'आप' के बाद टीएमसी की बारी है।'

'चूहे-बिल्ली' की राजनीति में विपक्षी एकजुटता ही सबसे बड़ी चुनौती

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, किशोरकुमार और नूतन की फिल्म 'दिल्ली का ठग' में गाना था- सीएटी कैट, कैट माने बिल्ली, आरएटी रैट, रैट माने चूहा, दिल है तेरे पंजे में तो क्या हुआ ! टॉम एंड जेरी की कार्टून फिल्म आपने टीवी पर देखी होगी। टॉम नामक बिल्ले को जेरी नामक चूहा खूप छकाता है। चूहे को अंडरएस्टिमेट मत कीजिएगा। वह बुद्धि विधाता गणेशजी का वाहन है। जब सुरंग ढहने से मजदूर अंदर फंस जाते हैं और पत्थर काटने वाली मशीनें भी उन्हें बचाने में असमर्थ रहती हैं तो रैटमाइनर कहलाने वाले श्रमिक छेनी-हथोड़ी से चट्टानें काटकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकालते हैं। सत्तापक्ष किसी मजबूत चट्टान से कम नहीं है। विपक्ष एकजुटा होकर रैटमाइनर की तरह लगन से भिड़ जाए तो कभी न कभी उसे कामयाबी मिल सकती है।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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