Navbharat Nishanebaaz: राहुल आरोप लगाते गली-गली, चुरा के वोट मेरा बीजेपी चली

Election Commission: राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद पर निशानेबाज ने व्यंग्य किया है। माखन चोरी से 'वोट थीफ' फिल्म तक, लेख में सियासी तंज है।
BJP Election Commission Vote Theft Controversy
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Highlights

  • लेख में राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों और चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों पर व्यंग्य किया गया है।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त को मिले कानूनी संरक्षण और विपक्ष की आपत्तियों के समय पर सवाल उठाए गए हैं।

  • 'माखन चोरी' और फिल्मी गीतों के उदाहरणों से वोट चोरी के मुद्दे पर राजनीतिक कटाक्ष किया गया है।

  • लेख में 'वोट थीफ' नाम से फिल्म बनाने का सुझाव भी व्यंग्यात्मक अंदाज में दिया गया है।

BJP Election Commission Vote Theft Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, राहुल गांधी कब तक वोट चोरी का घिसा हुआ रिकार्ड बजाते रहेंगे? हमें बहुत दुख होता है, जब वह पीएम मोदी की गरिमा का ध्यान न रखते हुए कहते हैं- चौकीदार चोर है! संत ज्ञानेश्वर फिल्म का गीत था- 'ज्योत से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो!' इसके विपरीत राहुल ज्ञानेशकुमार को निशाना बना रहे हैं। क्या उन्हें यह नहीं पता कि ऐसा कानूनी प्रावधान किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनके रिटायरमेंट के बाद भी उनके किसी भी कार्यकलाप को लेकर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस कानूनी कवच को कोई भेद नहीं सकता। जब 2024 के चुनाव के पहले ड्राफ्ट मतदाता सूची आ गई थी, तभी विपक्ष ने आपत्ति क्यों नहीं जताई ? अब बीजेपी और सीईसी को वोट चोर कहकर क्यों बदनाम किया जा रहा है?'

हमने कहा, 'जब जागे तभी सवेरा।' यदि राहुल गांधी को साहित्यिक हिंदी आती तो वह कह सकते थे- 'चोर-चोर मौसेरे भाई!' वह चाहें तो बीजेपी और चुनाव आयोग की तथाकथित मिलीभगत को लेकर फिल्मी गीत गा सकते हैं- 'चोरी-चोरी जो तुमसे मिले तो लोग क्या कहेंगे, अजी इस प्यार कहेंगे, अजी इसे प्यार कहेंगे!'

BJP Election Commission Vote Theft Controversy
नवभारत निशानेबाज: राजनीति से फिल्मों तक नंगापन, इसे देख बेचैन हो रहा मन

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यह मत भूलिए कि चोरी 64 कलाओं में से एक मानी जाती है। चोरी कहां नहीं है। कुछ लोग साहित्यिक चोरी करते हैं। दूसरे की लिखी कहानी, कविता या शायरी अपने नाम से छपवा लेते हैं। फिल्मों में अभिनय शैली की चोरी होती है। दिलीपकुमार की एक्टिंग स्टाइल की कुछ-कुछ नकल राजेंद्रकुमार, मनोजकुमार और शाहरुख खान ने की थी। भगवान श्रीकृष्ण को उनके भक्त प्रेम से माखनचोर कहते हैं। नंदबाबा के पास 9 लाख गाय थीं लेकिन फिर भी बालकृष्ण ग्वालबालों के साथ गोपियों के घर में घुसकर माखन चोरी की लीला करते थे। मां यशोदा के पूछने पर कहते थे मैया मोरी, कसम तोरी, मैं नहीं माखन खायो !

हमने कहा, 'आप द्वापर युग की माखन चोरी की दलील देकर वोट चोरी के ज्वलंत मुद्दे को दबा नहीं सकते। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेता आरोप लगा रहे हैं- 'चुरा के वोट मेरा बीजेपी चली!' हम तो कहते हैं कि जिस तरह 'ज्वेल थीफ' नामक फिल्म बनी थी, वैसे ही 'वोट थीफ' नाम से नई मूवी बनाई जानी चाहिए।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा