

Election Candidates Deposit Forfeiture: पड़ोसी ने हमसे कहा 'निशानेबाज, कुछ दिन पहले धरतीपकड़ कहलाने वाले प एक ऐसे व्यक्ति का निधन हो गया, जो चुनाव के मौसम में बहुत चर्चित हो जाता था। वह हर बार बुरी तरह हार जाता था। उसकी जमानत जब्त हो जाती थी, फिर भी चुनाव लड़ना नहीं छोड़ता था। लोकतंत्र के प्रति उसकी इतनी गहरी आस्था को देखते हुए उसे मरणोपरांत पद्म पुरस्कार देना चाहिए।'
हमने कहा, 'कोई जनाधार न रहते हुए भी चुनाव लड़ना सनक या बेवकूफी है। ऐसे लोग भी चुनाव में खड़े हो जाते हैं, जिन्हें गली का कत्ता भी नहीं जानता आश्चर्य होता है कि विधायक या सांसद की एक सीट के चनाव में 20-25 उम्मीदवार चुनाव लड़ने लग जाते हैं। इससे चुनाव की गंभीरता नष्ट हो जाती है।'
पड़ोसी ने कहा 'निशानेबाज, जब हर वयस्क को वोट देने का अधिकार है तो चुनाव लड़ने का भी अधिकार है। यदि नामांकन के समय दस्तावेज सही हैं तो किसी को उम्मीदवार बनने से नहीं रोका जा सकता। धरतीपकड़ ने यही किया। उसने विधायक से लेकर राष्ट्रपति पद तक का चुनाव लड़ा। चुनाव आते ही वह किसी भी क्षेत्र की धरती पकड़ लेता था और टस से मस नहीं होता था। उसे समझाने, धमकाने या प्रलोभन देने पर भी वह नाम वापस नहीं लेता था।
मतदान के दिन तक धरती को पकड़े रहता था और नतीजा आने पर उसी धरती पर पछाड़ खाकर बुरी तरह गिर जाता था। वह उस मकड़ी के समान था, जो ऊंचाई से बार-बार गिरने के बाद भी जाला बनाना नहीं छोड़ती। ऐसे लोग खुद को स्वयंभू नेता मान लेते हैं। उन्हें कर्म की चिंता रहती है, परिणाम की नहीं! पता है कि बुरी तरह हार जाएंगे, फिर भी उम्मीदवार बन जाते हैं। उन्हें प्रत्याशी के रूप में पूरी सुरक्षा मिलती है।
क्योंकि चुनाव होने के पहले मर गए तो चुनाव आगे के लिए टल जाता है। उनका नाम ईवीएम पर आ जाता है। परिचितों से चर्चा होती है कि पक्का नौटंकीबाज है। चैन से बैठने की बजाय हर बार फालतू खड़ा हो जाता है।'
हमने कहा, 'आटे में चोकर, शरीफों के बीच एकाध लोफर, कार में शोफर और ताश की गड्डी में जोकर होता है, ठीक वैसे ही धाकड़ उम्मीदवारों के बीच अचानक कोई धरती पकड़ आ धमकता है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा