नवभारत विशेष: बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री

Balen Shah Victory: नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद हुए चुनाव में बालेन शाह की RSP ने बड़ी जीत दर्ज की है। अब उनके सामने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और भारत-चीन के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की चुनौती होगी।
Navbharat Special: Balen Shah is the next Prime Minister of Nepal
बालेंद्र शाह ( सोर्स : शोसल मीडिया )
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Nepal Gen Z Movement: नेपाल में पुरानी राजनीतिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। काठमांडू के मेयर व पूर्व रैपर बालेंद्र शाह, जो बालेन शाह के नाम से अधिक विख्यात हैं, के नेतृत्व वाली नव-निर्मित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की जबरदस्त आंधी में सभी पुरानी व स्थापित पार्टियां सूखे पत्तों की तरह उड़ गई हैं।

आरएसपी ने प्रतिनिधि सभा की 165 फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सीटों में से 115 पर जीत दर्ज कर ली जबकि शेष 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाएंगी, नेपाल में 8-9 सितंबर 2025 को हुए जेन जी आंदोलन के बाद पहली बार आम चुनाव हुए थे और 5 मार्च 2026 को हुए मतदान में लगभग 65 प्रतिशत मतदान हुआ था।

जेन जी आंदोलन में 77 व्यक्तियों की मौत के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के। पी। ओली ने इस्तीफा दे दिया था और 12 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला काकों को अंतरिम प्रधानमंत्री की शपथ दिलाई गई थी, जो कि इस पद पर पहुंचने वाली नेपाल में पहली महिला हैं।

जेन जी आंदोलन को चुनावी जीत में बदलने वाले बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री होंगे। नेपाल में भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद, महंगाई, बेरोजगारी आदि से परेशान होकर जेन जी आंदोलन हुआ था। अब नेपाल की जनता चाहती है कि बालेन शाह उनकी उम्मीदों पर खरे उतरें और इन समस्याओं का समाधान करें। काम बहुत मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है।

मेयर और प्रधानमंत्री के पदों में बहुत अंतर होता है। प्रधानमंत्री पर देश की जिम्मेदारी तो होती ही है, साथ ही दूसरे देशों से संबंधों में संतुलन बनाए रखने का भी दायित्व होता है। बालेन शाह के समक्ष तो सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि काठमांडू, दिल्ली व बीजिंग दोनों से संबंधों में कैसे संतुलन बनाए रखें।

नेपाल के संविधान के अनुसार संघीय संसद सहित सभी सार्वजनिक कार्यालयों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण है। इस गारंटी के बाद से नेपाल में हर जगह महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ गया है। 50 वर्षीय रवी लामिछाने ने 2022 के चुनाव से पहले आरएसपी का गठन किया था। नवंबर 2022 के चुनाव में उनकी आरएसपी ने 20 सीटें जीती थीं और वह संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थीं।

गठबंधन की राजनीति के दौरान लामिछाने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की सरकार में उप प्रधानमंत्री व गृह मंत्री बनने में कामयाब रहे। फिर जनवरी 2023 में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने अवैध नागरिकता कागजात के आधार पर उनकी सदस्यता पर विराम लगा दिया, लेकिन उन्होंने वापसी की और नई गठबंधन सरकार में फिर गृह मंत्री बने।

लामिछाने ने अपनी अपील की सीमाओं को पहचाना और दिसंबर 2025 में आरएसपी में शामिल हुए। बालेन शाह को प्रधानमंत्री के चेहरे के रूप में पेश किया, जबकि वह स्वयं पार्टी के अध्यक्ष बने रहे। बालेन व उनके समर्थकों को आरएसपी में लाना लामिछाने की स्मार्ट व रणनीतिक चाल साबित हुई।

आरएसपी को ऐतिहासिक जीत दिलाकर युवा नेपालियों ने एकदम स्पष्ट संदेश दिया है, 'हमने तुम्हारे पक्ष में मतदान किया है, अब काम को अपने वायदों के अनुसार अंजाम दो।' कुछ गहरे मुद्दों भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कमजोर जन सेवाएं, भाई-भतीजावाद, राजनीतिक दंड मुक्ति और अवसरों के अभाव का समाधान शेष है। जब तक 35 वर्षीय बालेन शाह इन समस्याओं का हल नहीं करेंगे, तब तक 'सितंबर क्रांति' का कोई अर्थ नहीं है।

जेन-जी की शानदार विजय

बालेन शाह के पक्ष में मुख्य रूप से दो बातें की जाती हैं, एक, उन्हें स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी सरकार के अल्पमत में आने का खतरा नहीं रहेगा, जैसा कि पिछली सरकारों पर मंडराता रहता था।

साथ ही उन्हें अपनी नीतियों को लागू करने व अपने वायदों को पूरा करने के लिए पूरे 5 वर्ष का समय मिलेगा, दूसरा यह कि मंझे हुए नेताओं जैसे के.पी. ओली, माधव कुमार, प्रचंड आदि की राजनीतिक चालों से काफी हद तक महफूज रहेंगे, लेकिन बालेन शाह के पास अनुभव की कमी है, बावजूद इसके कि वह काठमांडू के मेयर रहे हैं।

लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा

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