नवभारत विशेष: लपटों में जलती बेशर्म व्यवस्था, कब तक होते रहेंगे ऐसे अग्निकांड?

Fire Incidents: दिल्ली के मालवीय नगर में बिना फायर NOC के चल रहे एक होटल में भीषण आग से 21 लोगों की मौत हो गई। जांच में भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण का खौफनाक सच सामने आया है।
delhi hotel fire Fire Safety Rules Violation
दिल्ली अग्निकांड (डिजाइन फोटो)
Updated on

Fire Safety Rules Violation: हाल के दिनों में देशभर में लगभग 4 दर्जन से ज्यादा आग लगने की जिन गंभीर घटनाओं का रिकॉर्ड चेक किया गया है, ज्यादातर बिल्डिंगों में फायर एनओसी नहीं थी, बिल्डिंग कोड वेरिफाई नहीं था और जितने कमरों की इजाजत थी, उससे कहीं ज्यादा अवैध तरीके से बनाए गए थे। एक के बाद एक दर्दनाक घटनाएं घट रही हैं, लेकिन स्थिति में जरा भी सुधार नहीं हो रहा। अकेले छह महीने के भीतर दिल्ली में ही आग लगने की ऐसी घटनाओं के चलते अधिकृत रूप से 66 लोगों की मौत हो चुकी है।

हर हादसे के बाद एक ही घिसा-पिटा पैटर्न

लगभग हर बड़ी आग के बाद एक जैसा ही पैटर्न सामने आता है। अवैध निर्माण, अपर्याप्त आपात निकास, फायर सेफ्टी उपकरणों का अभाव और भ्रष्टाचार के चलते प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ऐसी तमाम इमारतों को आंख मूंदकर दी गई इजाजत इस सबकी जिम्मेदार हैं। हर ऐसी घटना के बाद भारी शोर-शराबा होता है, जिम्मेदार लोगों को बख्शे न जाने की दुहाई दी जाती है, हर बार जांच समितियां बनती हैं, मुआवजें घोषित होते हैं और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के आश्वासन दिए जाते हैं। लेकिन एकाध महीने में ही न सिर्फ लोग बल्कि स्थानीय प्रशासन इन सब बातों को भूल जाते हैं।

राजधानी दिल्ली में इस साल हुए कई अग्निकांड

इसी साल मई में राजधानी दिल्ली के विवेक विहार क्षेत्र में एक आवासीय परिसर में आग लगी थी और देखते ही देखते 9 लोग जलकर मर गए थे। इसी साल राजधानी के कई अस्पतालों, गोदामों और बहुमंजिला इमारतों में आग की घटनाएं घट चुकी हैं। दिल्ली का उपहार सिनेमा कांड आग लगने की एक ऐसी वीभत्स घटना थी, जिसने पूरे देश को झकझोर करके रख दिया था। ऐसा नहीं है कि देश में फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों की कमी है। सच बात तो ये है कि राज्य में भवन निर्माण नियम, अग्निशमन अधिनियम और एनओसी हासिल करने की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन इस सबके बावजूद आग लगने की घटनाओं में जरा भी कमी नहीं आ रही।

NOC के बाद होते है मनमाने बदलाव

वास्तव में समस्या मौजूदा कानून के पालन की है और उसे अब शायद लोगों से मनवाना बहुत मुश्किल हो गया है। एक बार एनओसी हासिल करने के बाद मकान, दुकान या व्यावसायिक परिसर में मनमाने ढंग से फेरबदल कर लेते हैं। नए कमरे और नए फ्लोर निर्मित कर लेते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि ली गई एनओसी का कोई मतलब नहीं रह जाता। अखिर इन नियमों का लोग पालन क्यों नहीं करते? बावजूद इसके कि इनकी जिंदगी के लिए कई तरह के जोखिम होते हैं, तो इसका जवाब प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गहरे दलदल में है।

अगर लोग भ्रष्टाचार न करते हुए नियमों के पालन की कोशिश करते हैं, तो प्रशासनिक अमला उन्हें इतना परेशान करता है कि उन्हें भी लगता है कि थोड़ी सी घूस देकर इन सब जिम्मेदारियों से मुक्ति पाई जाए और फिर यही होता है। वास्तव में हमारे यहां पुलिस हो या प्रशासन का कोई दूसरा हिस्सा, लोगों को ईमानदारी से नियमों को पालन ही नहीं करने देते। क्योंकि लोगों के ईमानदारी से नियम पालन करने से उनकी भ्रष्टाचार के तहत कमाई नहीं होती। ऐसे में वे आम लोगों को इस कदर हतोत्साहित कर देते हैं कि व्यवहारिक जिंदगी में लोग नियमों से चलने की कल्पना करके ही कांप जाते हैं।

लपटों में जलती बेशर्म व्यवस्था

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लरिश स्टे के ग्राउंड फ्लोर स्थित रेस्टोरेंट में आग लग गई और देखते ही देखते आग पूरे चार मंजिल के होटल में फैल गई, कुछ ही मिनटों के भीतर पूरा होटल धू-धू करके जलने लगा, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा रेस्क्यू किए गए लोगों में से अभी भी कई जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

मरने वाले 21 लोगों में से 11 विदेशी हैं, जिनमें 9 अफ्रीकी और 2 केंद्रीय एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान के हैं। जबकि 10 भारतीयों में से 3 राजस्थान के, 5 हरियाणा के और 2 दिल्ली के हैं। पता चला है कि बिल्डिंग की फायर एनओसी नहीं थी। इस होटल के लिए सिर्फ 6 कमरों की इजाजत थी, लेकिन भ्रष्टाचार के संरक्षण में होटल में 25 कमरे बनाए गए थे।

लेख- वीना गौतम के द्वारा

Navbharat Live
navbharatlive.com