धैर्य से 24 बार किए प्रयास, आखिर पप्पू हो गया पास

Nishanebaaz
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पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, लोग लाड से अपने बेटे का नाम या तो लल्लू रखते हैं या प्यार से पप्पू रख देते हैं. इससे उनका वात्सल्य झलकता है. यह धारणा बना ली गई है कि पप्पू के लिए पास होना मुश्किल है. बीजेपी के सारे नेता और कार्यकर्ताओं ने देश में यह प्रचारित कर रखा है कि पप्पू बिल्कुल नासमझ है. वह कुछ भी नहीं जानता. कितने ही लोग इस सुनियोजित प्रचार या दुष्प्रचार से प्रभावित होकर मान बैठे हैं कि पप्पू अपरिपक्व या इम्मैच्योर है. यदि कोई निरंतर धैर्यशील प्रयास करे तो कामयाबी मिल ही जाती है.

धुन के पक्के जबलपुर के राजकरन बरुआ ने 23 बार फेल होने के बाद अपने 24 वें प्रयास में एमएससी गणित की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली. उनकी आयु अब 56 वर्ष हो गई है लेकिन असीम धैर्य का परिचय देते हुए यह सफलता अर्जित की. इस दौरान राजकरन ने सिक्योरिटी गार्ड रहने के अलावा अन्य छोटे-मोटे जॉब किए. 1997 से वह एमएससी की परीक्षा में बैठते रहे और 2021 में इसे उत्तीर्ण कर पाए.’’

हमने कहा, ‘‘कहावत है- करत-करत अभ्यास के जडमति होत सुजान, रस्सी आवत-जात के सिल पर पड़त निशान! आखिर पर्वतारोही भी बार-बार प्रयास कर एवरेस्ट के शिखर पर पहुंच ही जाते हैं. इसलिए कोई भी पप्पू उम्मीद कर सकता है कि अपना टाइम आएगा.’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह तो 3 दिसंबर को आनेवाले राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजे बताएंगे कि पप्पू पास हुआ या नहीं. फैसला मतदाताओं के हाथ है. कुछ भाषणों की अपने तरीके से व्याख्या करते हुए बीजेपी नेताओं ने ‘पप्पू’ को टारगेट किया था. एक भाषण में जनता को वादा किया गया था कि हम आपके इलाके में आलू की फैक्टरी लगाएंगे. इसका आशय आलू चिप्स या फ्रेंच फ्राइज की फैक्टरी लगाना था लेकिन बीजेपी नेताओं ने कहा कि पप्पू को यह भी नहीं पता कि आलू खेत में पैदा होते हैं, फैक्टरी में नहीं बनाए जाते. इस तरह विगत वर्षों में बीजेपी ने प्रमुख विपक्षी पार्टी के नेता को पप्पू कहना शुरू कर दिया. क्या पता कि पप्पू भी कभी अपने गप हांकने वाले विरोधियों को गप्पू साबित कर दे!’’

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