Navabharat Nishanebaaz: तोड़ा अहिंसा के पुजारी का विश्वास, आ गए डुप्लीकेट मोहनदास

NEET Protest Controversy: NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर T.G. मोहनदास के कथित विवादित बयान को लेकर सियासी विवाद छिड़ गया है। ‘निशानेबाज’ ने भी तंज कसा है।
Navabharat Nishanebaaz: Trust of the apostle of non-violence betrayed
निशानेबाजनवभारत डिजाइन फोटो
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Mohandas NEET Protest Remarks: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, यह मत समझिए कि हर चमकती चीज सोना होती है! अंग्रेजी में कहते हैं ऑल दैट ग्लिटर्स इज नॉट गोल्ड। विश्ववंदनीय बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, जो अहिंसा के पुजारी थे, लेकिन अब आरएसएस में भी एक मोहनदास पैदा हो गए हैं जो हिंसा के जबरदस्त हिमायती हैं।

संघ के विचारक टी.जी. मोहनदास ने नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं के बारे में जहर उगलते हुए कहा था कि अगर हालात संभालने की जिम्मेदारी उनके पास होती, तो वह जंतर- मंतर के आसपास 4 वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगाते फिर प्रदर्शनकारियों को 3 बार हटने की चेतावनी देने के बाद उन पर गोलियां चलवाते। कुछ की मौत हो जाती, कुछ घायल हो जाते। शवों को अस्पताल ले जाया जाता और 4 घंटे के भीतर सिचुएशन को कंट्रोल कर लिया जाता।'

हमने कहा, 'संघ के इस मोहनदास को चीन या उत्तर कोरिया जैसे तानाशाही देश में भेज देना चाहिए। वहां ऐसे वीभत्स सोचवाले इस हिंसक आदमी को शी जिनपिंग या किम जोंग अपना स्पेशल असिस्टेंट बना लेंगे। संघ का विचारक कहलाने वाले टी.जी. मोहनदास के तानाशाही विचारों का संघ प्रमुख ने अब तक खंडन नहीं किया? क्या उन्होंने इसे मौन सहमति दी है? क्या यही इस संगठन की असली विचारधारा है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, मोहनदास करमचंद गांधी के विचारों के विपरीत वर्तमान स्थिति देखी जा रही है। अहिंसा की जगह हिंसा, संयम की बजाय व्यभिचार, अपरिग्रह की बजाय चंदाचोरी। नेताओं के पास सैकड़ों की दौलत, ऐसा केयर फंड जिसके बारे में पूछना मना है, जिसके बल पर पार्टियां तोड़ी जाती हैं और सांसद-विधायक खरीदे जाते हैं।'

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हमने कहा, 'सदाचार की बजाय भ्रष्टाचार आ गया। मेक इन इंडिया सिर्फ नारा बनकर रह गया। गांधी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया था, लेकिन अब उसी ब्रिटेन से व्यापार समझौता कर मैनचेस्टर के कपड़े और ब्रिटेन में निर्मित व्हिस्की भारत मंगवाई जा रही है। बापू की सादगी की बजाय भड़कीलापन बढ़ता जा रहा है। शीर्ष नेता बहुरुपिए के समान बार-बार अपना परिधान बदलते हैं।

मराठी में इसे सोंगाड्या कहते हैं। महात्मा गांधी की खादी फैशन शो में चली गई है। गांव अपनी बदनसीबी पर रो रहे हैं और शहर चमकदार होते जा रहे हैं। असली मोहनदास करमचंद गांधी की तस्वीर सिर्फ नोटों पर रह गई है, जो बीयरबार से लेकर कोठों तक जा रहे हैं। दूसरी ओर हिंसा के समर्थक टी।जी। मोहनदास संघ के महान विचारक कहला रहे हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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