निशानेबाज: मोदी बनाते चाय तो राहुल बनाते पोहा, जिसने भी देखा, उसने सराहा

महाराष्ट्र चुनाव के बीच शनिवार को राहुल गांधी नागपुर पहुंचे। यहां उन्होंने अपना काफिला रामजी-श्यामजी पोहेवाले के यहां रोका और तर्री पोहा बनाया और खाया भी। फिर क्या था निशानेबाज ने पोहे को राजनीतिक प्रॉसेस से जोड़ दिया।
निशानेबाज: मोदी बनाते चाय तो राहुल बनाते पोहा, जिसने भी देखा, उसने सराहा
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नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को हर काम सीखने और उसमें हाथ आजमाने की गहरी रुचि है। नागपुर में रामजी-श्यामजी पोहेवाले के यहां अपना काफिला रोककर राहुल जा पहुंचे और लगे तर्री-पोहा बनाने! दूकानवाला गदगद और लोग चकित! सबको भरोसा हो गया कि तर्री-पोहे का असर चुनाव पर पड़ेगा। जिसने पोहा बना लिया वह राजनीति का प्रोसेस भी अच्छी तरह हैंडल कर लेगा। राहुल विदर्भ के तर्री-पोहा का प्रचार राहुल दिल्ली में भी करेंगे।’’

हमने कहा, ‘‘राहुल एक चर्मकार की दूकान पर पहुंचे थे तो वहां बैठकर खुद ही चप्पल सी डाली। बाद में उस चर्मकार को चप्पल सीने की आटोमेटिक मशीन भिजवा दी। इस तरीके से राहुल आम जनता से जुड़ते जा रहे हैं। जहां डेरा डाला, वहां के वोट पक्के!’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, हम सोचते हैं कि यदि राहुल गांधी इसरो पहुंच गए तो कहेंगे- मुझे बताओ, रॉकेट कहां है। मैं उसे अभी अंतरिक्ष में भेजकर दिखाता हूं। किसी की शादी में गए तो खुद ही वहां 7 फेरे लेने लग जाएंगे!’’

हमने कहा, ‘‘ऐसा बिल्कुल नहीं है। राहुल जनजीवन से जुड़ने और अपनापन दिखाने के लिए ऐसी पहल करते हैं। वे यह दिखाना चाहते हैं कि श्रम की महत्ता है तथा कोई भी काम छोटा नहीं है। वे वर्क कल्चर को इस तरह बढ़ावा देते हैं। यदि वे दिल्ली के अपने बंगले मं बैठे रहते तो जलेबी या पोहा बनाने की प्रक्रिया कैसे देख व सीख पाते? वे हर चीज का पर्सनल और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस हासिल कर रहे हैं।''

हमने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी बार-बार राहुल को कांग्रेस का शहजादा कहते हैं। यदि राहुल शहजादे जैसी शान-शौकत में डूबे रहते तो क्या गाड़ी से उतरकर खुद पोहा बनाते तथा अपने हाथों से लोगों को प्लेट सर्व करते! उनका स्वभाव एडवेंचरस है। वे कोई भी काम करने में संकोच नहीं करते। उनकी इस कार्यशैली से उनका और कांग्रेस का जनाधार बढ़ेगा। राहुल जनमत में इसी तरह स्थान बनाते रहे तो कभी न कभी देश के पीएम भी बन सकते हैं।’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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