Navbharat Nishanebaaz: हर किसी के अपने सरोकार, सभी का अपना-अपना परिवार

Modi Ka Parivar: प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद समर्थकों से सोशल मीडिया से ‘मोदी का परिवार’ टैग हटाने की अपील की। चुनाव से पहले यह बीजेपी के परिवारवाद विरोधी अभियान का हिस्सा था।
Modi Ka Parivar Slogan
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Modi Ka Parivar Slogan: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम तौर पर कहते हैं कि मेरा कोई अपना परिवार नहीं है। सारे 140 करोड़ भारतवासी मेरा परिवार हैं। उनकी यह सर्वसमावेशक बात बीजेपी के नेता-कार्यकर्ताओं के दिलों को छू गई। इस आत्मीयता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने नाम के साथ 'मोदी का परिवार' लिखना शुरू किया था।

यह देश की परिवारवादी पार्टियों को बीजेपी का करारा जवाब था। इसके बाद जब लोकसभा चुनाव में 'अबकी बार 400 पार' का नारा लगाने वाली बीजेपी जब 240 सीटों पर सिमट गई और बहुमत जुटाने के लिए चंद्राबाबू नायडू और नीतीशकुमार की पार्टियों की मदद लेनी पड़ी, तब पीएम मोदी ने अपने पार्टी नेताओं और समर्थकों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट से 'मोदी का परिवार' का पुछल्ला हटा देने को कहा।'

हमने कहा, 'परिवार का इस तरह बंटाढार होना ठीक नहीं है। याद कीजिए, पुराने बड़े संयुक्त परिवार में जहां बच्चे-बूढ़े, दादा-दादी, चाचा-चाची उनके बेटे बहुएं मिलाकर एक छत के नीचे 25-30 लोगों का परिवार रहा करता था। हर साल-दो साल में नया मेहमान जन्म लेता था और पालना हिला करता था। मेहमान आकर ठहर जाते थे और महीने भर से ज्यादा टिके रहते थे। कुछ दूर के रिश्तेदार भी परिवार में मुंहबोले संबंध का हवाला देकर डेरा जमा लेते थे। खेतों का अनाज आने से खाने की कमी नहीं पड़ती थी। मेहनती और निकम्मे, कमाने वाले और बेरोजगार सभी संयुक्त परिवार में खप जाते थे। घर का एक मुखिया रहता था। उसी का आदेश सभी पर चलता था।'

Modi Ka Parivar Slogan
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पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज हमने भी बड़ी जॉइंट फैमिली देखी है, लेकिन अब परिवार का मतलब पति-पत्नी और 2 बच्चे रह गया है। परिवार छोटा और जरूरतें बड़ी हो गई हैं। मजबूत आर्थिक आधार और बेहतर जीवनस्तर हासिल करने के लिए शादी भी काफी देर से की जाती है। नई पीढ़ी खूब कमाती और भरपूर खर्च करती है। बुजुर्गों की दादागिरी का जमाना बीत गया। अब जो बुजुर्ग बदली परिस्थिति में खुद को एडजस्ट कर लेते हैं, वे सुखी रहते हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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