कई खेल नदारद, नहीं है कोई बेस, कॉमनवेल्थ में नहीं कॉमनसेंस

ब्रिटेन के ग्लासगो शहर में होने वाले इस आयोजन में हॉकी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, शूटिंग और कुश्ती जैसे खेलों को हटा दिया गया है। इन खेलों का बाहर होना भारत के लिए एक बड़ा झटका है।
कई खेल गायब, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का कोई आधार नहीं
(डिजाइन फोटो)
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नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों में कॉमनसेंस का अभाव है। उनकी अक्ल घास चरने चली गई है। ब्रिटेन के ग्लासगो शहर में होनेवाले इस आयोजन में हॉकी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, शूटिंग और कुश्ती जैसे खेलों को हटा दिया गया है। इस तरह देखा जाए तो कॉमनवेल्थ गेम्स किसी काम का नहीं रह गया है। यह सूखे नींबू के समान है जिसमें 1 बूंद भी रस नहीं है। इसे निचोड़ा हुआ गन्ना भी कह सकते हैं।’’

हमने कहा, ‘‘आपकी नाराजगी हमें समझ में आ रही है। जिन खेलों में भारत मेडल जीतने की महारत या काबिलियत रखता है वह सारे महत्वपूर्ण इवेंट एक झटके में हटा दिए गए हैं। अब तक हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने बैडमिंटन में 31, हॉकी में 6, शूटिंग में 135, टेबल टेनिस में 28 और कुश्ती में 114 मेडल जीते हैं। ये सारे इवेंट हटाकर अंग्रेजों ने भारत के खिलाफ साजिश की है।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ग्लासगो कामनवेल्थ गेम्स के आयोजकों की दलील है कि खर्च बचाने के लिए ऐसा किया गया है। सारे इवेंट्स का प्रबंधन भी उनके लिए संभव नहीं था।’’

हमने कहा, ‘‘इसका मतलब यही हुआ कि घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने! ऐसा टुटपुंजिया आयोजन रखकर क्या फायदा! जब दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं तब भारत ने पूरे इवेंट के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किए थे। ग्लासगोवाले आयोजक पहले ही अपनी मजबूरी जाहिर करते तो भारत अपने यहां शान से कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित कर लेता। अब तो हमें इस बार के गेम्स में अपनी टीम ही नहीं भेजनी चाहिए क्योंकि वहां सिर्फ स्विमिंग, पैरा स्विमिंग, जिम्नास्टिक, ट्रैक साइकिलिंग, पैरा ट्रैक साइकिलिंग, नेट बॉल, वेट लिफ्टिंग, पैरा वेटलिफ्टिंग, बाक्सिंग, जूड़ो, बास्केट बाल, पैरा बास्केटबाल, बोलिंग जैसे इवेंट होंगे। जिन खेलों में भारत की पकड़ है, वह नदारद हैं।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कॉमनवेल्थ का मतलब होना चाहिए समान संपदा जिस पर सभी का अधिकार हो लेकिन यह ऐसे देशों का समूह है जो अंग्रेजों के गुलाम रह चुके हैं। कामनवेल्थ का प्रमुख हमेशा ब्रिटिश सम्राट होता है। अंग्रेजों के भारत आने के पहले विश्व की अर्थव्यवस्था का 23 प्रतिशत हिस्सा भारत में था। हम समृद्धतम थे। अंग्रेज 200 से ज्यादा वर्षों में यहां की दौलत लूट कर ले गए और खुद के संगठन को कॉमनवेल्थ कहते हैं। हमें तो इसकी मेंबरशिप भी छोड़ देनी चाहिए।’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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