नवभारत निशानेबाज: क्यों करते व्यर्थ की किट-किट मणिशंकर कांग्रेस में मिसफिट

Political Controversy: मणिशंकर अय्यर के 'मैं राहुलवादी नहीं' बयान से सियासी चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने खुद को गांधीवादी और नेहरूवादी बताते हुए राहुल गांधी से राजनीतिक दूरी की बात कही।
Navbharat Shooter: Why does Mani Shankar make such useless noise? A misfit in the Congress
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Congress Leadership Internal Debate: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'कुछ भूले-बिसरे नेता अपना अस्तित्व जताने के लिए व्यर्थ की बयानबाजी करते हैं ताकि उन पर ध्यान जा सके। मणिशंकर अय्यर हों या सैम पित्रोदा, सभी का यही हाल है। 84 वर्ष के मणिशंकर ने बयान दिया कि मैं गांधीवादी, और नेहरूवादी राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं। राहुल मुझसे काफी कम उम्र के हैं और राजनीतिक जीवन में मेरी उनसे दूरी भी काफी है।'

हमने कहा, 'उनका यह बयान एक तरह का फ्रस्ट्रेशन है। जच पार्टी में कोई पूछता नहीं और हाशिए पर डाल दिए गए हैं तो पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं कि वह बचपन में महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे। फिर नेहरू के आदर्शों का उन पर असर हुआ। इंदिरा गांधी का कोई उल्लेख न करते हुए मणिशंकर ने राजीव गांधी को याद किया, जिन्होंने उन्हें मंत्री बनाया था। उनके बयान का उद्देश्य खुद को राजनीति व पार्टी में सीनियर, अनुभवी जबकि राहुल गांधी को जूनियर या नौसिखिया बताना है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आपको बाद होगा कि जब मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए 'नीच' शब्द का प्रयोग किया था तो कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली थी। भारतीय विदेश सेवा में रह चुके और अंग्रेजी में सोचने वाले मणिशंकर को अंग्रेजी के 'मीन मेंटलिटी' शब्द का हिंदी अनुवाद ओछी मानसिकता नहीं सूझा, तो उन्होंने नीच कह दिया था। अय्यर व शशि थरूर जैसे नेता अंग्रेजी में पक्के और हिंदी में कच्चे हैं। अय्यर की शिकायत है कि उन्हें 22 वर्षों से एआईसीसी में बोलने नहीं दिया गया।'

हमने कहा, 'कांग्रेस के मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेडा ने कहा कि मणिशंकर अव्यर अब पार्टी में नहीं हैं। हमारे पास काफी बुजुर्ग नेता हैं जो हमें सिरदर्द देते रहते हैं। पड़ोसी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी की हालत उस पुराने चाकू के समान है, जिसका कभी हैंडल बदल दिया जाता है, तो कभी सामने का धारदार हिस्सा, लेकिन भावना यही है कि चाकू वही 141 साल पुराना है।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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