नवभारत विशेष: उद्धव व शरद पवार जैसा ममता का हाल, बुरी तरह टूट गई टीएमसी

TMC Internal Crisis: बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतोष की चर्चा और अभिषेक बनर्जी से जुड़े घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी के सामने नई राजनीतिक चुनौतियों की अटकलों को तेज कर दिया है।
Navbharat Special: Mamata Faces the Same Fate as Uddhav and Sharad Pawar; TMC Shattered
ममता बनर्जी, टीएमसी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mamata Banerjee Political Setback: बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को सत्ता खोने के बाद और 2 बड़े झटके लगे है। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर ईडी की 5 टीमों ने दस्तक दी और दूसरी ओर विधानसभा स्पीकर ने ऋतुब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट को मंजूरी दे दी। ऋतुब्रत ने दावा किया कि उनके पास पार्टी के दो तिहाई विधायकों का समर्थन है तथा हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 80 सीटें मिली हैं।

इस तरह दो तिहाई विधायकों के पार्टी से अलग होने पर ही उन्हें एक नए गुट के रूप में मान्यता मिल सकती है और इसके लिए 54 विधायक होने चाहिए। हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में पहली जैसी पकड़ नहीं है। टीएमसी से हाल में निकाले गए दो विधायक संदीपन शाह और ऋतव्रत बनर्जी ने कई विधायकों के साथ बैठक की है।

इनमें ममता बनर्जी के कई बिल्कुल खास विधायक हैं। उधर, भाजपा ने साफ कहा है कि टीएमसी विधायकों के लिए उनकी पार्टी के दरवाजे बंद है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि हमने बिना किसी बाहर की मदद के 207 विधायकों का आंकड़ा छू लिया है। इसलिए हमें किसी बाहरी विधायक की जरूरत नहीं है।

टीएमसी में टूट की अटकलों पर सियासी घमासान

विपक्ष के नेता शोभन चट्टोपाध्याय ने कहा कि पार्टी के टूटने की अफवाहें हताशा में दिए गए बयान हैं, इनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। सारे विधायक ममता बनर्जी के साथ रहेंगे और टीएमसी के संगठन पर अपना भरोसा जताएंगे। लेकिन कांग्रेस ने मौके पर चौका मारते हुए कहा है कि टीएमसी भले कुछ भी कहे, लेकिन टीएमसी एकजुट नहीं रह पाएगी। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा है कि ममता बनर्जी वही काट रही हैं, जो उन्होंने बोया है।

टीएमसी के कार्यकर्ताओं में भयानक असंतोष है, टीएमसी की टूट की तीन संभावनाएं बन रही हैं। पहली यह कि टीएमसी के कुल विधायकों में से 54 विधायक पार्टी से अलग हो जाएं, तो उन पर दल-बदल का कानून लागू नहीं होगा। दूसरी स्थिति यह है कि टीएमसी दो गुटों में बंट जाए, लेकिन दूसरे गुट को टीएमसी के रूप में मान्यता तभी मिलेगी, जब चुने हुए 54 विधायक उसके साथ होंगे और इसका फैसला चुनाव आयोग करेगा।

लेकिन टूटे हुए विधायकों को अलग पार्टी के रूप में तभी मान्यता मिल सकती है, जब न सिर्फ दो तिहाई विधायक बल्कि 28 में से 19 सांसद भी उनके साथ आ जाएं। क्योंकि अलग और मूल पार्टी के रूप में दावा बागी टीएमसी विधायकों का तभी साबित होगा।

हार के बाद टीएमसी में टूट की आशंका बढ़ी

महाराष्ट्र में 2019 में भाजपा और शिव सेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर विवाद हो जाने के कारण उद्धव ठाकरे ने भाजपा से अलग होकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर 'महाविकास अघाड़ी' बना ली थी। लेकिन जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 40 से ज्यादा विधायकों ने बगावत कर दी और इस तरह उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री का पद खो दिया। ठीक ऐसे ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को अजीत पवार ने 2023 में तोड़ दिया था।

फरवरी 2024 में निर्वाचन आयोग ने अजीत पवार गुट को आधिकारिक एनसीपी गुट माना था और उसे पार्टी का चुनाव चिन्ह घड़ी एलॉट कर दिया था। ठीक यही हश्र शिव सेना के साथ भी हुआ था, जब बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना का चुनाव चिन्ह उद्धव ठाकरे की जगह शिंदे गुट को मिल गया था। टीएमसी में ऐसा भी हो सकता है टीएमसी की समूची राजनीतिक संरचना ममता बनर्जी के ईद-गिर्द ही टिकी है। पिछले 15 वर्षों में सत्ता में रहते हुए ममता बनर्जी ने पूरी ताकत अपने हाथों में रखी है। ऐसे में जब पार्टी हार गई, तो जीते हुए विधायक, सत्ता सुख पाने के लिए इधर-उधर हाथ पैर मारने लगे हैं। इन विधायकों को लगता है वो टीएमसी के साथ बने रहेंगे तो उनका राजनीतिक भविष्य संकट में पड़ जाएगा।

बुरी तरह टूट गई टीएमसी

बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को सत्ता खोने के बाद और 2 बड़े झटके लगे। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर ईडी की 5 टीमों ने दस्तक दी और दूसरी ओर विधानसभा स्पीकर ने ऋतुव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट को मंजूरी दे दी। ऋतुव्रत ने दावा किया कि उनके पास पार्टी के दो तिहाई विधायकों का समर्थन है तथा हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं।

लेख-नरेंद्र शर्मा के द्वारा

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